
आदर्श सिंह की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजना को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा यूपी की महिलाओं को 20,000 की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस प्रस्ताव को केवल चुनावी पैंतरा करार दिया है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए भाजपा पर हमला बोलते हुए इस घोषणा को ‘चुनावी जुमला’ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा के पास अब सिर्फ़ पैसे का ही सहारा बचा है। अखिलेश ने यहां तक कह दिया कि यह सहायता राशि कुछ और नहीं बल्कि ‘पाप की कमाई’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अन्य राज्यों में भी महिलाओं से ऐसे ही आर्थिक वादे करके चुनाव तो जीत लिए, लेकिन सत्ता में आते ही भुगतान से मुकरने और पैसे वापस मांगने के हथकंडे अपनाए। हालांकि, अपनी इस पोस्ट में उन्होंने किसी राज्य या घटना का स्पष्ट प्रमाण साझा नहीं किया।
भाजपा के प्रस्ताव का जवाब अखिलेश यादव ने अपने अनोखे ‘राजनीतिक गणित’ से दिया। उन्होंने एक हिसाब पेश करते हुए कहा कि 50,000 प्रति वर्ष के हिसाब से 10 वर्षों में महिलाओं का हक 5 लाख बनता है। 20,000 की राशि इस कुल हक का केवल 4% ही है। महिलाओं का अभी भी 4.80 लाख बकाया रह जाता है।
अखिलेश ने इसे भाजपा का ’80:20 वालों का 96:4 वाला रिकॉर्ड’ करार दिया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह आंकड़ा अखिलेश यादव का राजनीतिक दावा है, न कि कोई आधिकारिक सरकारी बकाया।
भाजपा के 20 हजार के प्रस्ताव को पछाड़ते हुए अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने घोषणा की कि यदि उनकी सरकार आती है, तो वे महिलाओं को 40,000 की सहायता राशि से शुरुआत करेंगे, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाएगी।









