
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति बैठक से ठीक पहले अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक घमासान तेज हो गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और आक्रामक दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका की ब्याज दरें पूरी दुनिया में सबसे कम होनी चाहिए। आयरिश ओपन गोल्फ टूर्नामेंट के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की नीतियों और उच्च दरों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा वित्तीय आंकड़े या महंगाई की स्थिति चाहे जो भी संकेत दे रही हो, अमेरिका को वैश्विक स्तर पर सबसे सस्ती दरों पर पूंजी मिलनी चाहिए।
ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, वैश्विक व्यापार और अपनी वित्तीय समझ का हवाला देते हुए कई कारण गिनाए:
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‘दुनिया में सबसे बेहतरीन क्रेडिट’: ट्रंप ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास दुनिया में सबसे मजबूत और विश्वसनीय क्रेडिट प्रोफ़ाइल है। उनका तर्क है कि जब किसी देश की साख (Creditworthiness) सबसे उत्कृष्ट है, तो उसे दुनिया के किसी भी अन्य देश से अधिक ब्याज क्यों चुकाना चाहिए?
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‘हम दूसरे देशों को अमीर बना रहे हैं’: ट्रंप का मानना है कि अमेरिका में उच्च ब्याज दरें रखने से वैश्विक निवेशक अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर में अधिक रिटर्न कमाते हैं। उनके अनुसार, फेड की यह नीति अमेरिकी नागरिकों और व्यापारियों की जेब काटकर विदेशी देशों और निवेशकों को समृद्ध कर रही है।
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‘फॉर्मूले की सबसे बेहतर समझ’: ट्रंप ने आत्मविश्वास से कहा, “मैं वित्तीय फॉर्मूलों को किसी से भी बेहतर समझता हूं।” उनका कहना है कि कम ब्याज दरें आर्थिक विस्तार, विनिर्माण और उद्योगों के लिए ऑक्सीजन का काम करती हैं, जबकि केंद्रीय बैंक के जटिल मॉडल अर्थव्यवस्था की गति को धीमा कर देते हैं।
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व्यापार घाटे और टैरिफ की धमकी: ट्रंप ने हाल ही में यह चेतावनी भी दी थी कि यदि ब्याज दरों को कम नहीं किया गया, तो वे उन देशों के साथ व्यापार पूरी तरह रोक सकते हैं जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा (Trade Deficit) अधिक है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व की दर-निर्धारक समिति (FOMC) की बैठक होने जा रही है:
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महंगाई का ताजा उछाल: अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी हालिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों में पिछले चार महीनों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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दर कटौती बनाम वृद्धि की दुविधा: कच्चे तेल और ऊर्जा लागत में आई तेजी के कारण बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि फेड शायद ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय दरों को स्थिर रखे या फिर मामूली बढ़ोतरी करे।
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चुनावी माहौल और आम नागरिकों का दबाव: आगामी अमेरिकी मध्यावधि (Midterm) चुनावों से पहले जीवनयापन की लागत (Cost of Living) और लोन की ईएमआई मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। ऐसे में उच्च ब्याज दरें सीधे तौर पर गृह ऋण, कार ऋण और क्रेडिट कार्ड को महंगा बनाए हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और उसके फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। जहां नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के अधिकारियों का कहना है कि फेड के प्रमुख अपने स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं, वहीं ट्रंप का सार्वजनिक दबाव यह दर्शाता है कि सत्ता में वापसी या राजनीतिक विमर्श में वे ब्याज दरों को रिकॉर्ड निचले स्तर पर लाने के पक्षधर हैं, ताकि अमेरिकी घरेलू बाजार को सस्ता कर्ज मिल सके।






