- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज

नामांकन पत्र , मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज हो गया है। इस फैसले के बाद जहां कांग्रेस ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है, वहीं बीजेपी इसे पूरी तरह जायज बता रही है.
गौरतलब है कि तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है. दो सीटें बीजेपी को मिलनी तय हैं. तीसरी सीट के लिए बीजेपी ने महेश केवट को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. मुकाबला केवट और मीनाक्षी के बीच था. अब नामांकन खारिज होने के बाद केवट का राज्यसभा जाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
आखिर रिटर्निंग ऑफिसर के बंद कमरे में क्या हुआ? किस नियम के तहत मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया? और इस फैसले में क्या कानूनी पेचीदगियां हैं?

मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता भोपाल में चुनाव आयोग के सामने धरने पर बैठ गए
दोपहर 2 बजे से शाम 6:30 बजे तक: रिटर्निंग अधिकारी के कक्ष में कार्यक्रम
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को हुई। दोपहर 2 बजे, विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) कक्ष में हलचल हो गई।
- प्रारंभिक जांच: सबसे पहले बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच की गई. सभी दस्तावेज सही पाए गए और किसी भी पक्ष ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
- कांग्रेस प्रत्याशी पर आपत्ति: जैसे ही मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की जांच शुरू हुई, भाजपा ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई। आरोप था कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना के एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई और पूरी जानकारी नहीं दी.
- कमरे में हंगामा: उस वक्त मीनाक्षी नटराजन के साथ कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया मौजूद थे. आपत्ति दर्ज होते ही मीनाक्षी दौड़कर बाहर चली गईं। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को फोन कर विधानसभा में बुलाया.
- बहस के दो दौर: देखते ही देखते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधानसभा पहुंच गए. दोनों पक्षों के बीच करीब आधे घंटे तक बहस चली. रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि वह अगले दिन फैसला देंगे, लेकिन बीजेपी नेताओं ने उसी दिन फैसला लेने की मांग की.
- अंतिम निर्णय: शाम 5:30 बजे, दोनों पक्षों को फिर से बुलाया गया, और आधे घंटे की बहस हुई। सभी दलीलें सुनने के बाद शाम साढ़े छह बजे रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द करने का आदेश जारी कर दिया.
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आरओ का निर्णय
रिटर्निंग ऑफिसर के मुताबिक, मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की एक अदालत में एक निजी शिकायत (परिवाद) दायर की गई थी। कोर्ट ने 17 सितंबर 2025 को समन जारी कर उन्हें पेश होने का आदेश दिया था. इसको लेकर रिटर्निंग ऑफिसर ने तीन बिंदु बनाये
- हलफनामे को अधूरा माना गया क्योंकि इसमें निजी शिकायत का जिक्र नहीं था.
- समन जारी होने के बाद से मामला लंबित और सक्रिय माना गया।
- समन का जवाब देकर यह मान लिया गया कि मीनाक्षी को मामले की जानकारी थी.
अंतिम निर्णय: आदेश में कहा गया कि अधूरा हलफनामा (फॉर्म 26) जमा किया गया और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई। इसलिए, हैंडबुक के अध्याय 6 के बिंदु 10(xiii) के तहत नामांकन रद्द कर दिया गया।
एक्सपर्ट व्यू: फैसले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसरानी के मुताबिक नामांकन रद्द करने का फैसला नियमानुसार पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता. उन्होंने हैंडबुक के आधार पर तीन कानूनी जटिलताओं की ओर इशारा किया।
- इसरानी के मुताबिक हैंडबुक के प्वाइंट 10(xiii) के तहत नामांकन खारिज करने से पहले उम्मीदवार को गलती सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए. मीनाक्षी नटराजन को ये मौका नहीं मिला इसलिए सीधे तौर पर नामांकन खारिज करना सही नहीं है.
- सरानी ने हैंडबुक के प्वाइंट 10(xii) का हवाला देते हुए कहा कि केवल गलत, अधूरी या विरोधाभासी जानकारी वाले हलफनामे के आधार पर नामांकन खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
- इसरानी के मुताबिक, सिर्फ मामला दर्ज होने या समन जारी होने से कोई अयोग्य नहीं हो जाता। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्यता केवल तभी होती है जब अदालत किसी व्यक्ति को दोषी ठहराती है और सजा देती है।
अब कांग्रेस के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
विकल्प 1: कांग्रेस चुनाव आयोग से समीक्षा की मांग कर सकती है. यह तर्क दिया जा सकता है कि यह महज एक निजी शिकायत थी, एफआईआर नहीं। इसलिए इस जानकारी को हलफनामे में बताना जरूरी नहीं था.
विकल्प 2: कांग्रेस रिटर्निंग ऑफिसर को चुनौती दे सकती है (आरओ) हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर आदेश दें. यह सबसे तेज़ और सबसे प्रभावी कानूनी तरीका माना जाता है।
विकल्प 3: चुनाव और नतीजों के बाद कांग्रेस चुनाव याचिका के जरिए नतीजे को चुनौती दे सकती है। हालाँकि, इसमें अधिक समय लगेगा।









