सुई-धागे से बदली तकदीरः संगीता जुरी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बीजापुर 17 जून 2026

दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन से जीवन की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है, इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं विकासखंड बीजापुर के ग्राम दुगोली की निवासी श्रीमती संगीता जुरी। कभी खेती और मजदूरी पर निर्भर एक साधारण गृहिणी रहीं संगीता आज अपने सिलाई व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम दुगोली में रहने वाली संगीता जुरी का परिवार पहले खेती और मजदूरी से होने वाली सीमित आय पर निर्भर था। परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था। बेहतर भविष्य की तलाश में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया और 4 अप्रैल 2024 को रोस स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं।

समूह की नियमित बैठकों में भाग लेने के दौरान उन्हें बचत, आंतरिक ऋण, वित्तीय प्रबंधन एवं स्वरोजगार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से उन्हें सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपने हुनर को रोजगार में बदलने का संकल्प लिया। व्यवसाय शुरू करने के लिए संगीता ने ग्राम संगठन से सीआईएफ के माध्यम से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि से उन्होंने सिलाई केंद्र की स्थापना की। अपनी लगन, मेहनत और कौशल के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया और आज उनका सिलाई केंद्र गांव में अच्छी पहचान बना चुका है।

वर्तमान में संगीता जुरी प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रही हैं और बच्चों के भविष्य को भी संवार रही हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं में भी आत्मनिर्भर बनने का विश्वास जगाया है।

संगीता की यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। एनआरएलएम के सहयोग से उनके जीवन में आया यह सकारात्मक परिवर्तन आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक कहानी बन चुका है। “संगीता जुरी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सपनों को साकार करने के लिए संसाधनों से अधिक जरूरी है आत्मविश्वास, मेहनत और आगे बढ़ने का जज्बा।

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