October 27, 2026 11:54 pm

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हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतजार

उत्तराखंड: हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने व केंद्र सरकार की अनुमति के बिना वहां भूमि आरक्षित करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने और बिना केंद्र सरकार की अनुमति के भूमि आरक्षित करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सभी पक्षों की विस्तृत बहस और दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान पर्वतीय राज्य की मूल अवधारणा पर जोरदार बहस हुई। कहा गया कि राज्य बनने का मुख्य उद्देश्य पहाड़ों का विकास था। याचिका कर्ताओं ने तर्क दिया कि यदि उच्च न्यायालय को नैनीताल से स्थानांतरित करना ही है, तो उसे मैदानी क्षेत्र के बजाय पहाड़ के ही किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाना चाहिए। मामले में याचिकाकर्ता व राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है।

याचिका में केंद्र सरकार की अनिवार्य अनुमति का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई 2026 के आदेश और उत्तराखंड सरकार की 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना में भी उक्त भूमि को वन भूमि ही माना गया है। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के कड़े प्रावधानों के तहत किसी भी रिजर्व फॉरेस्ट भूमि को डी-रिजर्व करने या उसके स्वरूप को बदलने का कानूनी अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास निहित है, न कि राज्य सरकार या अन्य प्राधिकरणों के पास। ऐसे में बिना केंद्रीय मंजूरी के इस भूमि का हस्तांतरण पूरी तरह से नियमों के विपरीत और गैर-कानूनी है।

राज्य सरकार की तरफ से इन तर्कों का खंडन करते हुए कहा गया कि हाईकोर्ट शिफ्टिंग के लिए आगे की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है। सरकार का पक्ष था कि जिस स्थान पर उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है, वह कोई हाथी कॉरिडोर नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने नैनीताल जिले में कहीं भी उपयुक्त भूमि चिन्हित करने को कहा था, तो सरकार केवल हल्द्वानी में ही इसे शिफ्ट करने पर क्यों अड़ी है, जबकि अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। फिलहाल, सभी पक्षों की दलीलें दर्ज कर खंडपीठ ने अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

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