
धार जिले के सरदारपुर वन परिक्षेत्र के कौद बीट के शेरगढ़ गांव में मेट्रो रेल परियोजना के तहत काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए किया गया पौधारोपण सवालों के घेरे में है।
करीब तीन माह पहले वन विभाग ने 30.178 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 30178 पौधे लगाए थे, लेकिन अब इनमें से हजारों पौधे सूख गए हैं। कई जगह तो पौधों का नामोनिशान तक नहीं है। जहां पौधे लगाए गए थे वहां अब केवल सूखे डंठल ही नजर आ रहे हैं।
इस वृक्षारोपण पर लगभग 1 करोड़ 91 लाख 77 हजार रुपये खर्च किये गये। इसका उद्देश्य मेट्रो रेल परियोजना में काटे गए पेड़ों की भरपाई करना और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना था। लेकिन मौजूदा हालात योजना की सफलता पर सवाल खड़े करते हैं.
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वन विभाग ने ये पौधे तीन माह पहले लगाए थे।

1 करोड़ 91 लाख रुपए से लगाए गए पौधे सूख गए।
कई स्थानों पर केवल सूखे डंठल ही बचे थे
मौके पर बड़ी संख्या में सूखे पौधे मिले। कई स्थानों पर तो पौधों का अस्तित्व ही नजर नहीं आता। इससे यह सवाल उठता है कि पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल और निगरानी कितनी गंभीरता से की गई।
केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है
विशेषज्ञों के अनुसार वृक्षारोपण सिर्फ पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं है। उनकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि पौधारोपण के बाद रखरखाव नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा. शेरगढ़ का ये मामला भी इसी तरफ इशारा करता है.
सरकारी खर्च और निगरानी पर प्रश्न
पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए सरकार हर साल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाती है। ऐसे में अगर काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए लगाए गए हजारों पौधे पहले तीन महीने में ही सूख जाएं तो योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
वृक्षारोपण अभियान की सफलता सिर्फ पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने से तय होती है। शुरुआती महीनों में बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो गए तो करोड़ों रुपये खर्च करने का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
रेंजर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस मामले में सरदारपुर वन रेंज के रेंजर शैलेन्द्र सोलंकी से टिप्पणी के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.









