
Sudhanshu Trivedi: बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने संसद में जारी विपक्ष के हंगामे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की हमेशा से आदत रही है कि वे सदन में जवाब नहीं सुनना चाहते हैं। उन्होंने पूछा कि जब गृह मंत्री अमित शाह हर विषय पर जवाब देने को तैयार हैं तो कांग्रेस क्यों भाग ही है? कांग्रेस का सदन में चर्चा से भागने का इतिहास रहा है।
सुधांशु त्रिवेदी ने मंगलवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘सदन के इस सत्र में जो कुछ घटित हो रहा है वे निश्चित रूप से लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती के जैसे सामने आ रहा है। संविधान निर्माताओं ने कल्पना नहीं की होगी कि देश के सर्वोच्च सदन को कोई बिगड़ा दिल शहजादा अपनी उदंडता और सनक के आधार पर बंधक बना कर रख लेगा। विगत कई सप्ताह से विपक्ष, खासकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार साबित किया है कि वे सार्थक चर्चा सदन में नहीं चाहते हैं। लगातार उन्होंने अपनी एक के बाद मांग बदली है। पहले उन्होंने कहा था कि नीट की परीक्षा को लेकर नियम में बदलाव होने चाहिए, जिसे मान लिया गया। छात्रों की मांग थी कि कठोर कानून बनने चाहिए, मंजूर कर लिया गया। कैबिनेट में प्रस्ताव पारित हुआ और नया बिल भी बन गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए उसे भी स्वीकार कर लिया गया। केस हटने की बात हुई जिन्हें भी मान लिया गया।’
‘…तो कांग्रेस क्यों सदन चलने नहीं दे रही?’
उन्होंने आगे कहा, ‘हर बार वे एक नई मांग लेकर खड़े हो जाते हैं। फिर उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह सदन में आकर बयान दें। अब जब गृह मंत्री सदन में बयान देने को तैयार हैं उसके बाद भी सदन क्यों नहीं चलने दिया जा रहा है? हम कांग्रेस पार्टी से यह साफ पूछना चाहते हैं कि हर कदम पर आप अपनी एक नई डिमांड खड़ी कर रहे हैं और जब आपकी मांगें पूरी कर ली जाती हैं, उसके बाद भी आप सदन को नहीं चलने दे रहे।’
कांग्रेस का भागने का ‘इतिहास’ रहा है- सुधांशु
भाजपा नेता ने कांग्रेस का ‘इतिहास’ गिनाते हुए कहा, ‘इससे पहले भी सदन में ऐसे अनेक अवसर रहे हैं कि जब किसी भी विधेयक पर अंतिम जवाब दिया जाता है तब कांग्रेस पार्टी भाग खड़ी होती है। अभी हाल ही में भी राज्यसभा में ऐसा ही हुआ था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री का जवाब सुने बिना ही भाग खड़े हुए थे। मणिपुर पर प्रधानमंत्री का जवाब नहीं सुना और सीट छोड़कर चले गए। आज हम कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से कहना चाहते हैं कि गृह मंत्री सदन में आकर हर विषय पर जवाब देने को तैयार हैं, आप भागिए मत। हम बहुत स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं आप सदन से भागिए मत।’
‘राहुल गांधी का आचरण लोकतांत्रिक व्यवस्था पर संकट’
उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने कल्पना नहीं की होगी की नेता प्रतिपक्ष जैसे गरिमापूर्ण पद पर, जहां इनसे वरिष्ठ नेता खड़गे जैसे वरिष्ठ नेताओं ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद संभाला। इससे पहले जब अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में विपक्ष के नेता थे, तब भी ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गई। उस समय के बारे में सोचिए जब अरुण जेटली विपक्ष के नेता थे, या अटल जी की सरकार के दौरान जब सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह विपक्ष में थे। क्या ऐसा नजारा पहले कभी देखा गया था? यह भारत के लोकतंत्र के लिए आज राहुल गांधी का आचरण एक चुनौती बनकर खड़ा है। यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा संकट कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का आचरण है।









