September 15, 2026 3:49 am

दक्षिण अफ्रीका में खौफनाक मंजर: हाईवे पर दो मिनीबस और SUV के परखच्चे उड़े, 21 लोगों की दर्दनाक मौत

दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी तटीय प्रांत वेस्टर्न केप से एक अत्यंत हृदयविदारक और भयावह सड़क दुर्घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश के परिवहन सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। वेस्टर्न केप प्रांत के प्रमुख नेशनल हाईवे पर रविवार देर रात हुए एक भीषण त्रि-वाहन हादसे में कम से कम 21 निर्दोष यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। यह दर्दनाक हादसा देश की राजधानी केपटाउन से लगभग 380 किलोमीटर पूर्व दिशा में स्थित प्रिंस अल्बर्ट और ली-गामका कस्बों के बीच प्रमुख परिवहन गलियारे पर घटित हुआ। टक्कर इतनी हिंसक और जोरदार थी कि वाहनों के परखच्चे उड़ गए और तेज आवाज सुनकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी अफरा-तफरी मच गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय आपदा प्रबंधन, प्रांतीय एम्बुलेंस दल, दमकल विभाग और यातायात सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया।

साउथ अफ्रीका के रोड ट्रैफिक मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन (RTMC) और वेस्टर्न केप मोबिलिटी विभाग द्वारा साझा की गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना की शुरुआत दो खचाखच भरी मिनीबस टैक्सियों की आमने-सामने की तेज रफ्तार भिड़ंत से हुई। ओवरटेकिंग या नियंत्रण खोने के चलते दोनों टैक्सियां पूरी गति के साथ एक-दूसरे से टकराईं, और ठीक उसी क्षण पीछे से तीव्र गति से आ रही एक अनियंत्रित स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV) भी सीधे दुर्घटनाग्रस्त टैक्सियों के मलबे में जा घुसी। दो मिनीबसों और एसयूवी के आपस में टकराने के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और कई यात्री बुरी तरह से मुड़ी हुई धातु की सीटों के बीच फंस गए। पैरामेडिक्स और रेस्क्यू टीमों को हाइड्रोलिक कटर और जीवन रक्षक कटर मशीनों का इस्तेमाल करके शवों और घायल यात्रियों को बाहर निकालना पड़ा। तीन अति-गंभीर घायलों को नाजुक हालत में निकटवर्ती क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिससे कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर 21 तक पहुंच गया।

दक्षिण अफ्रीका में मिनीबस टैक्सियां रोजाना लाखों कामकाजी नागरिकों, छात्रों और आम जनता के लिए आवागमन का सबसे प्राथमिक और सस्ता सार्वजनिक परिवहन साधन मानी जाती हैं, लेकिन साथ ही वे सबसे घातक खतरा भी बन चुकी हैं। कमजोर तकनीकी रखरखाव, वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरना, ड्राइवरों द्वारा लंबी शिफ्ट में बिना आराम किए तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना और राष्ट्रीय राजमार्गों पर जोखिम भरे ओवरटेकिंग के कारण ये टैक्सियां आए दिन भयानक हादसों का शिकार होती हैं। इससे पहले इसी वर्ष जनवरी के महीने में दो अलग-अलग मिनीबस दुर्घटनाओं में 14 स्कूली बच्चों समेत कम से कम 25 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। लगातार हो रहे इन जानलेवा हादसों ने देश में निजी मिनीबस टैक्सी उद्योग के अनियंत्रित संचालन और सख्त सुरक्षा मानकों के अभाव पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता में गहरा रोष फैल रहा है।

हादसे की भीषणता को देखते हुए प्रशासन ने प्रिंस अल्बर्ट और ली-गामका के बीच स्थित रणनीतिक एन1 (N1) नेशनल हाईवे को दोनों तरफ से पूरी तरह बंद कर दिया ताकि फोरेंसिक विशेषज्ञ और मैकेनिकल टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा सकें। रोड ट्रैफिक मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन (RTMC) ने एक उच्चस्तरीय जांच दल गठित कर दिया है, जो दुर्घटना में शामिल वाहनों की ब्रेक विफलता, गति सीमा के उल्लंघन, टायर फटने और चालकों की शारीरिक थकान जैसे पहलुओं की गहन वैज्ञानिक जांच कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई है कि अस्पतालों में भर्ती कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे गति सीमा का कड़ाई से पालन करें और रात के समय लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान विशेष सावधानी बरतें।

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