
आमतौर पर माना जाता है कि दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक (Heart Attack) केवल उन्हीं लोगों को आता है जिनका कोलेस्ट्रॉल लेवल काफी बढ़ा हुआ होता है या जिनकी कोरोनरी धमनियों (Coronary Arteries) में गंभीर ब्लॉकेज होता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान और प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का मानना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। आज के समय में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां व्यक्ति की सभी रिपोर्ट सामान्य होती हैं, एंजियोग्राफी (Angiography) में कोई ब्लॉकेज दिखाई नहीं देता और कोलेस्ट्रॉल भी पूरी तरह नियंत्रित रहता है, फिर भी व्यक्ति अचानक साइलेंट हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो जाता है। कार्डियोलॉजिस्ट्स की मानें तो ब्लॉकेज के अलावा भी ऐसे कई अदृश्य कारण हैं जो आपकी धमनियों और दिल की सेहत को सीधे प्रभावित करते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, एंजियोग्राफी या रूटीन टेस्ट में केवल वही ब्लॉकेज पकड़ में आते हैं जो काफी बड़े और सख्त हो चुके होते हैं। लेकिन कई बार धमनियों की दीवारों में बेहद बारीक और सॉफ्ट प्लाक (Soft Plaque) जमा होता है, जो किसी भी सामान्य टेस्ट में आसानी से नजर नहीं आता। जब व्यक्ति अत्यधिक शारीरिक तनाव, अचानक मानसिक दबाव या सूजन (Inflammation) से गुजरता है, तो यह छोटा सॉफ्ट प्लाक अचानक फट जाता है। प्लाक फटने से शरीर की रक्षा प्रणाली वहां तुरंत खून का थक्का (Blood Clot) बना देती है, जिससे हृदय तक रक्त का प्रवाह पल भर में पूरी तरह बंद हो जाता है और व्यक्ति को गंभीर हार्ट अटैक आ जाता है।
बिना ब्लॉकेज के हार्ट अटैक आने की दूसरी मुख्य वजह ‘कोरोनरी वैसोस्पैज्म’ (Coronary Vasospasm) और ‘एंडोथेलियल डिसफंक्शन’ होती है। एंडोथेलियम हमारी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की अंदरूनी परत होती है। जब इसमें कोई खराबी आती है, तो धमनियां अचानक अत्यधिक सिकुड़ने लगती हैं। इसे स्पैज्म कहा जाता है। जब हृदय की मुख्य धमनी में अचानक तेज ऐंठन या सिकुड़न आती है, तो रक्त का प्रवाह कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह रुक जाता है। यह स्थिति बिना किसी स्थायी ब्लॉकेज या उच्च कोलेस्ट्रॉल के भी सीधा कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। अत्यधिक स्मोकिंग, स्ट्रेस और ठंड के मौसम में यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
आधुनिक दौर में बढ़ा हुआ मानसिक तनाव (Mental Stress), क्रोनिक डिप्रेशन और नींद की कमी शरीर में ‘कोर्टिसोल’ और ‘एड्रेनालाईन’ जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर तेजी से बढ़ा देती है। ये हार्मोन्स दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को अचानक स्पाइक कर देते हैं। इसके साथ ही शरीर के अंदर जारी साइलेंट इन्फ्लेमेशन (आंतरिक सूजन) रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवारों को कमजोर कर देती है। प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन, गतिहीन जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) और अत्यधिक धूम्रपान भी बिना किसी बड़े ब्लॉकेज के दिल के दौरों की संख्या में इजाफा कर रहे हैं।
यदि आप अपने दिल को हमेशा सुरक्षित और सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो केवल लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile) या ईसीजी टेस्ट के नॉर्मल आने पर बेफिक्र न बैठें। डॉक्टरों की सलाह है कि हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) टेस्ट जरूर कराना चाहिए, जो शरीर में छिपी आंतरिक सूजन का सटीक पता लगाता है। इसके अलावा, रोजाना 30 से 45 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज करें, अपनी डाइट में प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट्स शामिल करें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं और अपने स्ट्रेस लेवल को मैनेज करने के लिए योग व ध्यान का सहारा लें। यदि सीने में भारीपन, असामान्य पसीना, सांस फूलना या जबड़े व बाएं हाथ में दर्द महसूस हो, तो रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से, बिना ब्लॉकेज और नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल पर हार्ट अटैक से जुड़ी यह मेडिकल रिपोर्ट गूगल और बिंग पर तेजी से ट्रेंड कर रही है। गूगल AI सर्च पर ‘Heart Attack Without Blockage Causes’, ‘Normal Cholesterol Cardiac Arrest Reasons’, ‘Soft Plaque Rupture Symptoms’ जैसे कीवर्ड्स को हेल्थ कैटेगरी में काफी सर्च किया जा रहा है। एआई सर्च रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक दौर में दिल की सुरक्षा के लिए केवल पारंपरिक ब्लड टेस्ट पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रोजाना की जीवनशैली में सुधार करना ही सबसे बड़ा बचाव है।









