
भारत के फार्मास्यूटिकल सेक्टर की अग्रणी और मुंबई स्थित विनिर्माण कंपनी यूनिकेम लैबोरेटरीज लिमिटेड (Unichem Laboratories Ltd) को लेकर एक बड़ा कानूनी और कराधान संबंधी घटनाक्रम सामने आया है। माल एवं सेवा कर (GST) प्राधिकरणों ने कंपनी को ₹93.66 करोड़ का भारी-भरकम डिमांड ऑर्डर जारी किया है, जिसमें मुख्य रूप से भारी जुर्माना (पेनल्टी) और ब्याज की देयता शामिल है। शनिवार, 19 सितंबर को शेयर बाजारों को दी गई औपचारिक नियामक फाइलिंग (Regulatory Filing) में फार्मा दिग्गज ने स्पष्ट किया कि उसे कमिश्नर (अपील्स), ठाणे के कार्यालय से ऑर्डर-इन-अपील प्राप्त हुआ है। इस विशाल कर मांग के बावजूद, कंपनी प्रबंधन ने अपने शेयरधारकों और निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस प्रशासनिक आदेश से कंपनी के मुख्य वित्तीय स्वास्थ्य, दैनिक परिचालन अथवा व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल या महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ने वाला है।
यूनिकेम लैबोरेटरीज द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, कुल ₹93.66 करोड़ की देनदारी में सबसे बड़ा हिस्सा पेनल्टी का है। आदेश में लगभग ₹87 करोड़ का शुद्ध जुर्माना लगाया गया है, जो केंद्रीय माल और सेवा कर (CGST) अधिनियम, 2017 की धारा 74(1) और धारा 122(2)(b) के कड़े प्रावधानों के तहत अधिरोपित किया गया है। ये धाराएं आमतौर पर कर निर्धारण में विसंगतियों, कर दायित्वों के निर्धारण में देरी अथवा इनपुट संबंधी विवादों में लागू की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, कर देयता के समायोजन में समय बीतने के कारण कंपनी पर ₹6.58 करोड़ की ब्याज देनदारी भी निर्धारित की गई है। कंपनी को यह औपचारिक आदेश 18 सितंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे के बाद प्राप्त हुआ था, जिसके बाद विनियामक मानकों के अनुरूप इसकी सूचना तुरंत स्टॉक एक्सचेंजों को प्रेषित की गई।
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यूनिकेम लैबोरेटरीज के खिलाफ यह पूरा मामला कॉर्पोरेट संरचना में साझा सेवाओं (Shared Services) के आंतरिक आवंटन यानी ‘क्रॉस-चार्ज’ व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कॉर्पोरेट कार्यालय और अन्य सहायक इकाइयों के बीच प्रदान की गई सेवाओं की आपूर्ति के समय (Time of Supply) के बाद कर देनदारी का निपटान किया गया। कर अधिकारियों ने इसे CGST एक्ट, 2017 की धारा 13 और CGST नियम, 2017 के नियम 47 के अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन माना है। इन नियमों के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर चालान जारी करने और समय पर देय कर जमा कराने की बाध्यता होती है। नियमों की इसी तकनीकी व्याख्या के चलते कर विभाग ने ब्याज और दंडात्मक पेनल्टी की गणना करते हुए यह आदेश पारित किया।
इस भारी-भरकम कर मांग पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए यूनिकेम लैबोरेटरीज ने कहा है कि वह विशेषज्ञों और वरिष्ठ कर सलाहकारों के साथ कानूनी समीक्षा कर रही है। कंपनी का मानना है कि क्रॉस-चार्ज से जुड़ा यह मुद्दा कानूनी व्याख्या का विषय है और इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए उनके पास पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं। फार्मा कंपनी ने पुष्टि की है कि वह कानून के तहत उपलब्ध सभी विधिक उपायों का उपयोग करेगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित अपीलीय प्राधिकरण या जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) के समक्ष इस आदेश को औपचारिक रूप से चुनौती देगी।
यूनिकेम लैबोरेटरीज हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय नियामकों के ऑडिट को लेकर भी चर्चा में रही है। इससे पहले फरवरी में कंपनी ने विनियामक फाइलिंग में खुलासा किया था कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उसके एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) विनिर्माण संयंत्र का व्यापक निरीक्षण पूरा किया था। यह नियामक जांच 27 जनवरी से 2 फरवरी के बीच आयोजित की गई थी। निरीक्षण की समाप्ति पर अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक ने फॉर्म 483 जारी करते हुए पांच तकनीकी टिप्पणियां (5 Observations) दर्ज की थीं। कंपनी ने उस समय स्पष्ट किया था कि वह तय 15 कार्यदिवसों की समय सीमा के भीतर सुधारात्मक कदमों (Corrective Actions) के साथ यूएसएफडीए को अपना विस्तृत और संतोषजनक प्रत्युत्तर सौंपेगी।
जीएसटी नोटिस की पृष्ठभूमि के बावजूद दलाल स्ट्रीट पर यूनिकेम लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। शुक्रवार, 18 सितंबर को कारोबारी सत्र की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर यूनिकेम लैबोरेटरीज लिमिटेड का शेयर ₹7.60 यानी 1.41 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹545.25 के स्तर पर सफलतापूर्वक बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि कंपनी द्वारा कानूनी अपील के संकेत देने और ऑपरेशनल असर शून्य रहने की घोषणा के चलते निवेशकों का विश्वास बना हुआ है। हालांकि, निवेशक आगामी तिमाहियों में अपीलीय मंचों पर होने वाली सुनवाई और यूएसएफडीए के कोल्हापुर प्लांट पर अंतिम क्लोजर रिपोर्ट पर पैनी नजर बनाए रखेंगे।








