September 21, 2026 5:26 am

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1 अक्टूबर से नोएडा और गाजियाबाद में ‘नो PUCC, नो फ्यूल’: बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, जानें नया नियम

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम से पहले वायु प्रदूषण पर कड़ा प्रहार करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। 1 अक्टूबर 2026 से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों—नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) और गाजियाबाद—में स्थित सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ (No PUCC, No Fuel) नियम अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।

इस नई नीति के तहत यदि आपके दोपहिया, चारपहिया या व्यावसायिक वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) एक्सपायर हो चुका है, तो ईंधन भराने के लिए लाइन में लगने के बावजूद पंप कर्मचारी आपको पेट्रोल, डीजल या सीएनजी देने से साफ मना कर देंगे। प्रशासन का उद्देश्य हवा में जहर घोलने वाले धुआं छोड़ते अनफिट वाहनों को सड़कों से बाहर करना और वायु गुणवत्ता में 30 से 35 फीसदी तक सुधार लाना है।

इस व्यवस्था को शत-प्रतिशत पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने के लिए पेट्रोल पंपों पर आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है:

  • ANPR कैमरों से ऑटोमैटिक ट्रैकिंग: एनसीआर के जिलों में स्थित 1,000 से अधिक ईंधन स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल पंप की लेन में प्रवेश करेगा, कैमरा तुरंत उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा।

  • परिवहन पोर्टल से लाइव मिलान: यह सिस्टम सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के ‘वाहन’ और ‘परिवहन PUC पोर्टल’ से जुड़ा होगा। स्क्रीन पर चंद सेकंड में वाहन के प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता (Valid / Expired) प्रदर्शित हो जाएगी।

  • सेल्समैन ऐप और मैनुअल चेकिंग: जब तक सभी छोटे-बड़े पंपों पर हाई-टेक कैमरे पूरी तरह सक्रिय नहीं होते, तब तक पेट्रोल पंप कर्मियों (सेल्समैन) को विशेष मोबाइल ऐप दिए गए हैं। पंप पर गाड़ी का नंबर दर्ज करते ही पॉल्यूशन स्टेटस सामने आ जाएगा और अमान्य पाए जाने पर नोजल लॉक कर दिया जाएगा।

यदि आपका वाहन बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के सड़क पर दौड़ता हुआ या चेकिंग में पकड़ा जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 190(2) के तहत चालक या वाहन मालिक पर सीधे ₹10,000 का दंडात्मक चालान लगाया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर मामलों में तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने और कारावास का भी विधिक प्रावधान है।

गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग के अनुसार, वर्तमान में दोनों जिलों में 50,000 से अधिक ऐसे वाहन पंजीकृत हैं जिनका पीयूसीसी लंबे समय से रिन्यू नहीं हुआ है। इनमें निजी कारों और बाइकों के अलावा पुराने ऑटो, मालवाहक गाड़ियां और स्कूल बसें भी शामिल हैं। 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले इन सभी वाहन स्वामियों को अपना प्रमाण पत्र अपडेट कराने की चेतावनी दी गई है।

गाजियाबाद और नोएडा सर्दियों के महीनों में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में अक्सर शीर्ष पर रहते हैं। यहां चलने वाले लाखों दैनिक वाहनों का उत्सर्जन (Vehicular Emission), निर्माणाधीन परियोजनाओं की धूल और पराली का धुआं मिलकर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को 400 के पार ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा देते हैं।

इस संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने से पहले ही अग्रिम कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। गाजियाबाद में लगभग 135 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी स्टेशनों को इस सख्त प्रोटोकॉल के दायरे में लाया गया है।

अंतिम समय की अफरातफरी और पंपों पर ईंधन न मिलने की परेशानी से बचने के लिए वाहन चालक तत्काल अपना पीयूसीसी रिन्यू करा सकते हैं:

  1. नजदीकी अधिकृत टेस्टिंग सेंटर: नोएडा, गाजियाबाद या दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर स्थित अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र पर जाएं।

  2. टेस्टिंग प्रक्रिया: केंद्र संचालक आपके वाहन के साइलेंसर में सेंसर पाइप लगाकर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन के स्तर की जांच करेगा और वाहन का लाइव फोटो खींचेगा।

  3. ऑनलाइन जनरेशन: जांच सफल होते ही डेटा सीधे सरकारी परिवहन सर्वर पर अपलोड हो जाएगा और आपको एक अधिकृत डिजिटल रसीद मिल जाएगी।

  4. डिजिटल डाउनलोड: आप परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट (parivahan.gov.in) पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक दर्ज करके डिजिटल PUCC डाउनलोड कर सकते हैं या इसे अपने ‘mParivahan’ और ‘DigiLocker’ ऐप में सुरक्षित रख सकते हैं।

  5. वैधता अवधि: बीएस-4 (BS-IV) और बीएस-6 (BS-VI) मानकों वाले नए चारपहिया वाहनों के लिए पीयूसीसी सामान्यतः 1 वर्ष के लिए वैध होता है, जबकि पुराने व अन्य वाहनों के लिए यह अवधि 6 महीने की होती है।

  • यदि आप दैनिक रूप से दिल्ली से नोएडा, ग्रेटर नोएडा या गाजियाबाद आवागमन (कम्यूट) करते हैं, तो अपनी गाड़ी के दस्तावेजों की जांच आज ही कर लें।

  • केवल फिजिकल कार्ड पर निर्भर रहने के बजाय यह सुनिश्चित करें कि आपका पीयूसीसी रिकॉर्ड सरकारी परिवहन पोर्टल पर ‘एक्टिव’ दिख रहा हो।

  • 1 अक्टूबर के बाद बिना पीयूसीसी के पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक बहस करने से बचें, क्योंकि कैमरे की फुटेज के आधार पर ट्रैफिक पुलिस सीधे ऑनलाइन ई-चालान भी जारी कर सकती है।

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