September 27, 2026 2:26 pm

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1,453 शव बरामद और 5,285 लोग लापता, क्षत-विक्षत अवशेषों की पहचान के लिए DNA प्रोफाइलिंग बनी एकमात्र सहारा

पड़ोसी देश नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आए अप्रत्याशित और भीषण जलप्रलय को पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन प्राकृतिक आपदा का यह जख्म अब भी ताजा और डरावना बना हुआ है। हिमालयी सीमांत क्षेत्र से फूटी प्रलयंकारी बाढ़ और उसके साथ आए विशाल भूस्खलनों ने मध्य और उत्तरी नेपाल की पूरी भौगोलिक तस्वीर को बदलकर रख दिया है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की ताजा आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाआपदा में अब तक 1,453 लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,285 लोग अब भी मलबे और लापता सूची में दर्ज हैं। प्राकृतिक आपदाओं के इतिहास में इस घटना को हालिया दशकों की सबसे विनाशकारी घटनाओं में गिना जा रहा है, जिसने पहाड़ी बस्तियों, प्रमुख व्यापारिक मार्गों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

इस विनाश की शुरुआत नेपाल और तिब्बत सीमा के संवेदनशील पहाड़ी गलियारे से हुई, जहां अचानक हुए मूसलाधार बादलों के फटने और ग्लेशियर टूटने की घटनाओं के बाद उफनती भोटेकोशी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। पानी की प्रचण्ड लहरें अपने साथ विशालकाय बोल्डर, कीचड़ और पेड़ों के तने लेकर निचले मैदानी और आवासीय इलाकों की तरफ दौड़ीं। देखते ही देखते कंक्रीट के मकान, बहुमंजिला होटल, अनगिनत चार पहिया गाड़ियां, भारी लोडिंग ट्रक, राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख संपर्क पुल तिनके की तरह बह गए। सीमावर्ती इलाकों में स्थित कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं पानी के अत्यधिक दबाव और मलबे के भराव के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में ऊर्जा और संचार व्यवस्था ठप हो गई। चीनी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से यह भी सामने आया है कि इस सीमांत आपदा ने तिब्बत के भी कई हिस्सों को प्रभावित किया, जहां 43 नागरिकों की मौत हो गई और 500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

आपदा के तुरंत बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। शनिवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुर्गम पहाड़ी खाइयों और बाढ़ग्रस्त बस्तियों से अब तक कुल 13,795 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाए गए बेघर नागरिकों में से 1,113 लोग वर्तमान में विभिन्न जिलों में स्थापित 21 होल्डिंग सेंटरों और अस्थायी राहत तंबुओं में शरण लिए हुए हैं। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो रसुवा जिले के शिविरों में सर्वाधिक 805 विस्थापित लोग रह रहे हैं, जबकि धाडिंग में 212 और नुवाकोट के राहत केंद्रों में 187 लोग बुनियादी सुविधाओं के सहारे जिंदगी की नई शुरुआत करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन इन केंद्रों में भोजन, शुद्ध पेयजल और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध करा रहा है ताकि विस्थापितों को प्राकृतिक आपदा के गहरे मानसिक सदमे से उबारा जा सके।

प्राकृतिक आपदा के बाद जलजनित महामारियों और संक्रामक रोगों के खतरे को रोकने के लिए व्यापक स्वास्थ्य अभियान चलाया गया है। राहत एजेंसियों और सेना के मेडिकल कोर ने बाढ़ और मलबे से प्रभावित लगभग 11,000 नागरिकों को प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान की है। विभिन्न क्षेत्रीय अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल सात लोगों का गहन उपचार अब भी जारी है। हालांकि, व्यापक बचाव कार्यों के बावजूद सबसे बड़ा मानवीय संकट मृतकों के पार्थिव शरीरों की पहचान को लेकर खड़ा हो गया है। एक महीने की अथक खोजबीन के बाद बरामद किए गए 1,453 शवों में से अब तक केवल 112 शवों की ही प्रत्यक्ष पहचान हो सकी है और उन्हें अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंपा गया है। शेष शवों की शिनाख्त प्रशासन के लिए एक अत्यंत जटिल और भावनात्मक चुनौती बनी हुई है।

बाढ़ के पानी के साथ सैकड़ों टन मलबे, रेत और पत्थरों में हफ्तों तक दबे रहने तथा पानी के तेज बहाव में दूर तक बह जाने के कारण अधिकांश शव पूरी तरह से क्षत-विक्षत, विकृत और कंकाल के रूप में तब्दील हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य शारीरिक बनावट या कपड़ों के आधार पर मृतकों की पहचान कर पाना तकनीकी रूप से असंभव साबित हुआ है। इस मानवीय संकट का समाधान निकालने के लिए नेपाल पुलिस की फॉरेंसिक विंग ने अत्याधुनिक डीएनए प्रोफाइलिंग तकनीक को अपना मुख्य आधार बनाया है। वैज्ञानिकों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने अब तक बरामद शवों और मानवीय अवशेषों से 1,329 डीएनए नमूने सुरक्षित रूप से एकत्र किए हैं। वहीं दूसरी तरफ, लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे व्यथित परिवारों और रिश्तेदारों से 2,060 संदर्भ डीएनए सैंपल लिए गए हैं, ताकि प्रयोगशाला में दोनों सैंपलों का क्रॉस-मैच कराकर कानूनी और जैविक पहचान स्थापित की जा सके।

नागरिकों की सुविधा और पारदर्शी सूचना तंत्र के उद्देश्य से नेपाल पुलिस ने अपनी आधिकारिक डिजिटल वेबसाइट पर 1,421 अज्ञात शवों का संपूर्ण विवरणात्मक डेटा अपलोड किया है। इसमें शवों के साथ मिले विशिष्ट आभूषण, कपड़ों के टुकड़े, टैटू, जन्मचिह्न और अन्य भौतिक पहचान चिह्नों को डिजिटल रूप में संकलित किया गया है ताकि दूरदराज के लोग घर बैठे अपने लापता परिजनों से जुड़े सुराग तलाश सकें। दूसरी ओर, आपदा के भीषण पैमाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि काठमांडू और आसपास के जिलों के सभी सरकारी मुर्दाघरों और शीतगृहों में शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता पूरी तरह समाप्त हो गई। मुर्दाघरों में जगह के भारी अभाव और संक्रामक बीमारियों के फैलने के खतरे को देखते हुए, प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवश्यक विधिक, चिकित्सीय और डीएनए नमूना संग्रह की प्रक्रियाएं पूर्ण करने के उपरांत कई अज्ञात अवशेषों को पूर्ण वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और सम्मान के साथ सुरक्षित रूप से दफनाने का कठिन निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में डीएनए मैच होने पर कानूनी साक्ष्य उपलब्ध रह सकें।

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