October 3, 2026 3:52 pm

[aioseo_breadcrumbs]

ट्रंप के भारी दबाव के आगे झुके G7 देश: इमरजेंसी रिजर्व से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर बनी सहमति

वैश्विक ऊर्जा बाजार में आसमान छूती ईंधन कीमतों और गहराते संकट के बीच दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) ने एक बड़ा आपातकालीन कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बढ़ते कूटनीतिक और आर्थिक दबाव के बाद G7 देश और यूरोपीय संघ (EU) अपने सामरिक आपातकालीन भंडार (Strategic Emergency Reserves) से 100 मिलियन यानी 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और परिष्कृत डीजल जारी करने पर सहमत हो गए हैं। शुक्रवार को फ्रांस की अध्यक्षता में आयोजित जी7 देशों की उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की गई। इस साझा कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से डीजल की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों को नीचे लाना और सप्लाई चेन को स्थिर करना है।

इस बड़े फैसले के पीछे वाशिंगटन का आक्रामक रुख मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी डीजल की कीमतों और आगामी 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) को देखते हुए ट्रंप प्रशासन पर घरेलू महंगाई नियंत्रित करने का भारी दबाव था। ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर साफ शब्दों में दबाव बनाया था कि वे अपने भारी डीजल स्टॉक को तुरंत बाजार में उतारें। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी थी कि अगर यूरोपीय सहयोगी देश अपना आपातकालीन भंडार जारी नहीं करते हैं, तो अमेरिका घरेलू बाजार को राहत देने के लिए अपने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध (Export Ban) लगा सकता है। इस दबाव के बाद फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन समेत यूरोपीय संघ के देश झुकने को मजबूर हुए और साझा रणनीति पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, सहमति बनने के बाद ट्रंप ने रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यूरोप और अमेरिका मिलकर दुनिया की मदद कर रहे हैं और अब कोई एक्सपोर्ट बैन नहीं लगाया जाएगा।

जी7 और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के समन्वय से तैयार योजना के तहत यह 10 करोड़ बैरल की निकासी अगले चार महीनों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। इसमें सबसे अहम भूमिका डीजल की होगी, जिसकी वैश्विक स्तर पर भारी किल्लत देखी जा रही है।

  • डीजल का तत्काल फ्लो: यूरोप के आपातकालीन स्टॉक से लगभग 5 करोड़ बैरल रिफाइंड डीजल जारी किया जाएगा, जिसकी बड़ी खेप पहले 20 दिनों के भीतर सीधे बाजार में पहुंचाई जाएगी।
  • कच्चे तेल की आपूर्ति: शेष 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल IEA के सदस्य देशों के रणनीतिक भंडार से निकाला जाएगा।
  • निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं: जी7 देशों ने एक साझा संकल्प लिया है कि संकट के इस दौर में सहयोगी देश एक-दूसरे को होने वाले ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर कोई सीमा या प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।

ऊर्जा बाजार में यह ऐतिहासिक हस्तक्षेप ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक तेल आपूर्ति कई मोर्चों पर संकट झेल रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य व लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर खतरों के चलते खाड़ी देशों से तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही रूस की कई बड़ी रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों के बाद रूस द्वारा ईंधन निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों ने वैश्विक डीजल बाजार को झकझोर कर रख दिया था। अमेरिका में डीजल की कीमतें 6.50 डॉलर प्रति गैलन के ऐतिहासिक स्तर को छू चुकी थीं, जिससे माल ढुलाई, कृषि और विनिर्माण लागत तेजी से बढ़ रही थी।

जी7 देशों के इस संयुक्त ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी और यूरोपीय बेंचमार्क डीजल फ्यूचर्स में 3% से 5% तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस साझा फैसले और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता से बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी आएगी और ईंधन की कीमतें तेजी से सामान्य होंगी। हालांकि, कुछ ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि चार महीनों में 10 करोड़ बैरल की मात्रा दैनिक वैश्विक खपत (जो करीब 10 करोड़ बैरल प्रतिदिन है) के मुकाबले सीमित है। ऐसे में यह कदम आने वाले सर्दियों के मौसम में कुछ समय के लिए घबराहट और पैनिक बाइंग को तो रोक सकता है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता मिडिल ईस्ट में शांति और रिफाइनरियों की पूर्ण क्षमता बहाली पर ही निर्भर करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R . 1

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!