
सनातन हिंदू धर्म परंपरा में किसी भी मांगलिक कार्य, व्यापारिक अनुबंध, नवीन प्रतिष्ठान के उद्घाटन, गृह प्रवेश या यात्रा की शुरुआत से पहले दैनिक पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। पंचांग के पांच प्रमुख अंग—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—मिलकर उस दिन की ऊर्जा और ब्रह्मांडीय स्थिति को निर्धारित करते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा समेत देश भर के विभिन्न शहरों में 16 सितंबर 2026, दिन बुधवार का पंचांग विशेष ज्योतिषीय गणनाएं लेकर आया है। आज का दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के प्रभाव में रहेगा। सूर्योदय के समय दिन की शुरुआत देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले विशाखा नक्षत्र और वैधृति योग के विशिष्ट प्रभाव में हो रही है। बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश और ग्रहों के राजकुमार बुध देव को समर्पित होता है, इसलिए आज के दिन बुद्धि, व्यापार, शिक्षा, संचार और बैंकिंग से जुड़े कार्यों में विशेष सफलता मिलने के योग बनते हैं।
पंचांगीय गणना के अनुसार 16 सितंबर 2026 का मुख्य ढांचा इस प्रकार है:
| पंचांग अंग / तत्व | आज की स्थिति व समय | विवरण / स्वामी |
| वार (Day) | बुधवार (Wednesday) | भगवान गणेश एवं बुध देव का दिन |
| विक्रम संवत | 2083 (कालयुक्त / सिद्धार्थ) | प्रमादी संवत्सर |
| शक संवत | 1948 | शुभकृत |
| मास (Month) | भाद्रपद (पूर्णिमांत एवं अमान्त) | शुक्ल पक्ष |
| तिथि (Tithi) | षष्ठी तिथि (सायंकाल तक, तदोपरांत सप्तमी) | नंदा तिथि (कार्तिकेय जी की पूजा का दिन) |
| नक्षत्र (Nakshatra) | विशाखा नक्षत्र (दोपहर बाद तक, फिर अनुराधा) | स्वामी: गुरु / देवता: इंद्र-अग्नि |
| योग (Yoga) | वैधृति योग (तदोपरांत विष्कुंभ योग) | स्थिर व संयम से काम लेने का योग |
| करण (Karana) | कौलव करण (तदोपरांत तैतिल करण) | चर संज्ञक करण |
| सूर्य राशि | कन्या राशि (Sun in Virgo) | कन्या संक्रांति काल |
| चंद्र राशि | तुला राशि (दोपहर बाद वृश्चिक राशि में गोचर) | शुक्र व मंगल का प्रभाव |
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार नई दिल्ली और उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए सूर्य और चंद्रमा के उदय व अस्त की सटीक खगोलीय गणना इस प्रकार रहेगी:
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सूर्योदय (Sunrise): प्रातः 06:06 AM
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सूर्यास्त (Sunset): सायं 06:24 PM
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चंद्रोदय (Moonrise): सुबह 10:14 AM (16 सितंबर)
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चंद्रास्त (Moonset): रात्रि 09:48 PM (16 सितंबर)
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दिन की कुल अवधि: 12 घंटे 17 मिनट 45 सेकंड
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दिशाशूल: उत्तर दिशा (यदि उत्तर दिशा की यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से सौंफ, तिल या धनिया खाकर निकलें)।
किसी भी नए व्यवसाय की शुरुआत, रजिस्ट्री, सोने-चांदी की खरीदारी, वाहन क्रय या धार्मिक अनुष्ठान के लिए शुभ मुहूर्तों का चयन सकारात्मक ऊर्जा और सफलता को सुनिश्चित करता है। आज के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:33 AM से 05:19 AM तक (यह समय ईष्ट देव की साधना, ध्यान और अध्ययन के लिए सर्वोत्तम है)।
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प्रातः संध्या: प्रातः 04:56 AM से 06:06 AM तक।
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अमृत काल: सुबह 07:42 AM से 09:15 AM तक (इस समय में नया कार्य शुरू करना बेहद मंगलकारी होता है)।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 PM से 03:08 PM तक (मुकदमे, प्रतिस्पर्धा, परीक्षा और कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय दिलाने वाला समय)।
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:24 PM से 06:48 PM तक।
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सायाह्न संध्या: सायं 06:24 PM से 07:35 PM तक।
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निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 11:52 PM से 12:39 AM (17 सितंबर) तक।
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अभिजीत मुहूर्त: बुधवार के दिन ज्योतिषीय नियमों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता है या यह दोषयुक्त माना जाता है, इसलिए आज के दिन अभिजीत के स्थान पर अमृत काल या विजय मुहूर्त को प्राथमिकता दें।
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल को दिन का सबसे नकारात्मक समय माना गया है। राहुकाल के दौरान किए गए महत्वपूर्ण कार्यों, सौदों, वित्तीय निवेशों या नवीन यात्राओं में अवांछित बाधाएं, कानूनी विवाद या आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
16 सितंबर 2026 (बुधवार) के अशुभ और त्याज्य समय:
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राहुकाल (Rahu Kaal): दोपहर 12:17 PM से 01:49 PM तक। इस 1 घंटा 32 मिनट की समयावधि में कोई भी नया प्रोजेक्ट, अनुबंध पर हस्ताक्षर, धन का बड़ा लेन-देन या गृह प्रवेश बिल्कुल न करें।
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यमगंड (Yamaganda): प्रातः 07:38 AM से 09:10 AM तक।
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गुलिक काल (Gulika Kaal): सुबह 10:43 AM से दोपहर 12:15 PM तक।
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दुर्मुहूर्त (Durmuhurat): दोपहर 11:51 AM से 12:41 PM तक।
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वर्ज्य काल: रात्रि 10:12 PM से 11:45 PM तक।
आज दिन की शुरुआत विशाखा नक्षत्र में हो रही है। विशाखा नक्षत्र 27 नक्षत्रों की श्रृंखला में 16वां नक्षत्र है, जिसके स्वामी ज्ञान और विस्तार के कारक देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) हैं और इसके अधिष्ठाता देव स्वर्ग के राजा ‘इंद्र’ और ऊर्जा के प्रतीक ‘अग्नि देव’ हैं। यह नक्षत्र लक्ष्य प्राप्ति, दृढ़ संकल्प, उद्यमशीलता, नेतृत्व क्षमता और महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना जाता है। विशाखा नक्षत्र के प्रभाव से आज के दिन किए गए रणनीतिक फैसलों, राजनीतिक कार्यों, शोध, उच्च शिक्षा और टीम वर्क में उत्तम परिणाम प्राप्त होंगे। दोपहर बाद जब चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, तो मन में सौम्यता, मित्रता और आध्यात्मिक रुझान बढ़ेगा।
वहीं आज बनने वाला वैधृति योग पंचांग का अंतिम योग माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में वैधृति योग को अत्यंत संवेदनशील और उग्र योग माना गया है। इस योग के दौरान व्यक्ति को अपने क्रोध, जल्दबाजी और वाणी पर संयम रखना चाहिए। किसी से वाद-विवाद, कटु वचन या जोखिम भरे सट्टेबाजी वाले लेन-देन से बचना चाहिए। यह योग धैर्यपूर्वक चिंतन करने, पुराने अधूरे कार्यों को व्यवस्थित करने और योग-साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
बुधवार के दिन भाद्रपद शुक्ल षष्ठी तिथि और विशाखा नक्षत्र का संयोग बनने से यह दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और बुद्धि प्रदाता बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर बन गया है। यदि आपकी कुंडली में बुध कमजोर है, व्यापार में मंदी चल रही है, कर्ज से परेशानी है या बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है, तो आज इन 5 आसान उपायों को अवश्य अपनाएं:
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दूर्वा और मोदक का अर्पण: आज प्रातः स्नान के पश्चात तांबे या पीतल के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद श्री गणेश मंदिर जाकर या घर के पूजा स्थान में गणपति बप्पा को 21 दूर्वा (दूब घास) के जोड़े ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्पित करें और बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
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हरे मूंग का दान: बुधवार के दिन सवा किलो साबुत हरी मूंग की दाल किसी जरूरतमंद, सफाईकर्मी या मंदिर में दान करें। यह उपाय व्यापारिक रुकावटों को दूर करता है।
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गाय को हरा चारा खिलाएं: आज दोपहर से पहले किसी गौशाला में जाकर देसी गाय को हरा चारा, पालक या हरी घास अपने हाथों से खिलाएं। इससे बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
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बुध बीज मंत्र का जप: बुध देव की अनुकूलता और तार्किक बुद्धि के विकास के लिए तुलसी या रुद्राक्ष की माला से ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र की कम से कम 1 या 3 माला का जप करें।
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किन्नरों का आशीर्वाद लें: यदि संभव हो तो आज किसी किन्नर को हरे वस्त्र, चूड़ियां या कुछ दक्षिणा देकर उनका पैर छूकर आशीर्वाद लें और उनसे एक सिक्का लेकर अपनी तिजोरी या पर्स में रखें; यह उपाय धन आगमन के नए मार्ग खोलता है।
आज का दिन धैर्य, एकाग्रता और सुनियोजित कर्म का दिन है। दोपहर 12:17 से 01:49 बजे के राहुकाल का ध्यान रखते हुए शुभ मुहूर्तों में अपने महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन करें और भगवान गणेश की आराधना से अपने दिन को सफल व मंगलमय बनाएं।








