
सीबीआई ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में अदालत के समक्ष 636 पन्नों का विस्तृत चार्जशीट दाखिल किया है। इसमें न्यायाधीश गिरिबाला और उनके बेटे समर्थ समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दहेज हत्या, क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
बीएनएस की इन गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई
चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों पर बीएनएस (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जिसमें धारा 80 (2) दहेज हत्या से संबंधित, जिसमें न्यूनतम 7 वर्ष की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। धारा 85 पति या ससुराल वालों द्वारा की जाने वाली क्रूरता से संबंधित (3 साल तक की कैद)। धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप (10 साल तक की सजा और जुर्माना) और धारा 3(5) समान मंशा से किए गए कार्य। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लागू की गई हैं।
दूसरे पोस्टमार्टम में बड़ा खुलासा
जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश पर एम्स दिल्ली की टीम द्वारा एम्स भोपाल में ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम किया गया। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर परिवार द्वारा जताए गए संदेह के बाद यह कदम उठाया गया था। नई रिपोर्ट के अनुसार, त्विशा की मौत फांसी से हुई है।
फोरेंसिक एक्सपर्ट में उकसाने का आरोप
फोरेंसिक विशेषज्ञ दिनेश राव ने आरोपियों पर ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ का मामला दर्ज किए जाने पर हैरानी व्यक्त की। उनके अनुसार, अदालत में इस प्रकार के आरोपों को कानूनी रूप से साबित करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
CCTV फुटेज और टाइमस्टैम्प से छेड़छाड़ का विवाद
घटनास्थल के आवास से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज में लगभग 2 दिन, 2 घंटे और 20 मिनट की समय-अंतराल विसंगति पाई गई है। यद्यपि तकनीशियन ने इसे सॉफ्टवेयर या मेंटेनेंस से जुड़ी तकनीकी खराबी बताया, परंतु सैलून फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर CCTV से छेड़छाड़ के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौत के दौरान 46 संदिग्ध कॉल
जांच में सामने आया कि 12 से 14 मई के बीच आरोपी गिरिबाला ने न्यायिक अधिकारियों, डॉक्टरों, वरिष्ठ अफसरों, वकीलों और सीसीटीवी तकनीशियन सहित कई प्रभावशाली लोगों को करीब 46 कॉल किए थे। परिवार ने इन कॉल्स को मामले को दबाने या प्रभावित करने की साजिश बताया है।
फरार आरोपी और लिगेचर बेल्ट थ्योरी
जांच एजेंसी ने ‘लिगेचर बेल्ट थ्योरी’ और घटना के बाद मुख्य आरोपी पति समर्थ की संदिग्ध गतिविधियों को भी अपनी पड़ताल में शामिल किया है। समर्थ घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। CBI की इस चार्जशीट ने औपचारिक रूप से अदालत के समक्ष सबूत और आरोप रख दिए हैं। हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के दावों का प्रतिनिधित्व करते हैं और आरोपियों के अपराध का निर्धारण अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा किया जाएगा।
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