जयपुर में युगांडा की महिला में इबोला के लक्षण

राजस्थान में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध मामला सामने आया है। युगांडा से राज्य पहुंची एक महिला में इबोला संक्रमण जैसे लक्षण दिखे हैं।

महिला शुक्रवार सुबह (5 जून) एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर उतरी। हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग के दौरान उसकी पहचान एक संदिग्ध मामले के रूप में की गई।

उन्हें जयपुर के राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरयूएचएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया है और अन्य रोगियों के साथ संपर्क को रोकने के लिए अलग-थलग रखा गया है।

संदिग्ध मामले के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर आ गया है और स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।

नमूने जांच के लिए पुणे भेजे गए

आरयूएचएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि महिला में अभी तक इबोला वायरस संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है. इबोला संक्रमण से मिलते जुलते लक्षण पाए गए हैं.

केवल लक्षणों के आधार पर इसे इबोला नहीं माना जा सकता। परीक्षण रिपोर्ट के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा। हालांकि, एक विशेष प्रोटोकॉल के तहत महिला का इलाज और निगरानी शुरू कर दी गई है.

महिला के सैंपल जांच के लिए पुणे की लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आज शाम या कल सुबह आने की उम्मीद है.

भारत में अब तक एक भी केस नहीं

दुनियाभर में इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 900 तक पहुंच गई है. इसके कारण पिछले 20 दिनों में कांगो में 200 लोगों की मौत हो चुकी है. इबोला वायरस का 'बुंदीबुग्यो' वैरिएंट तेजी से फैल रहा है।

इसलिए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. भारत में अब तक इबोला वायरस का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

भारत सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की है?

इबोला वायरस को लेकर भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में 4 मुख्य बातें बताई गई हैं-

  • कांगो (डीआरसी), युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में इबोला संक्रमण का खतरा है।
  • हवाई अड्डों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • अज्ञात बुखार वाले यात्रियों की पहचान, परीक्षण, रिपोर्टिंग और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
  • डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों के अनुसार सावधानी बरतने और प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा कम से कम करने की सलाह दी गई है।

इबोला पहली बार 1976 में उभरा

दुनिया भर में, इबोला वायरस रोग (ईवीडी) से पीड़ित 25% से 90% रोगियों की मृत्यु हो जाती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में उभरा था। उस समय, सूडान और तत्कालीन ज़ैरे (अब कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य) में इसके मामले पाए गए थे।

इस वायरस का नाम इबोला नदी के नाम पर रखा गया था जो कांगो के उस क्षेत्र के पास बहती है जहां इसकी खोज की गई थी। यह घातक बीमारी संक्रमित व्यक्ति के रक्त, उल्टी और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है।

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