भारतीय इक्विटी बाजारों में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान जहां मुख्य बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स 100 से अधिक अंकों की बढ़त के साथ मजबूत दायरे में कारोबार कर रहे थे, वहीं घरेलू डिफेंस यानी रक्षा कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली का दबाव हावी रहा। लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली का सामना करते हुए ‘निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स’ कारोबारी सत्र के दौरान करीब 1 प्रतिशत तक टूट गया और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद संवेदनशील 9,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। यद्यपि निचले स्तरों पर घरेलू संस्थागत लिवाली के चलते दोपहर बाद कुछ नुकसान की भरपाई हुई और सूचकांक संभलकर 9,100 के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार करने लगा, लेकिन पिछले बंद स्तर 9,146 के मुकाबले यह लगातार लाल निशान में बना रहा। लगातार पांच कारोबारी सत्रों की इस तीव्र गिरावट ने डिफेंस बास्केट में कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत की भारी गिरावट ला दी है, जिससे हालिया तेजी के दौर में भारी प्रीमियम पर दांव लगाने वाले रिटेल और शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
पांच दिनों में 10% तक टूटा डिफेंस इंडेक्स: ₹1.10 लाख करोड़ के प्रस्तावों के बाद मुनाफावसूली का दौर
इस तेज गिरावट का तकनीकी और व्यावहारिक पहलू यह है कि इससे ठीक पहले डिफेंस शेयरों में एकतरफा तेजी देखने को मिली थी। 7 सितंबर को रक्षा मंत्री के नेतृत्व में आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की महत्वपूर्ण बैठक में लगभग ₹1.10 लाख करोड़ के विशाल रक्षा खरीद प्रस्तावों को प्रारंभिक मंजूरी दी गई थी। इस ऐतिहासिक घोषणा के दम पर 8 सितंबर को डिफेंस इंडेक्स 2.5 प्रतिशत तक उछल गया था। इन मंजूर प्रस्तावों का 98 प्रतिशत हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत विशुद्ध रूप से घरेलू भारतीय रक्षा विनिर्माताओं से खरीदे जाने के लिए आरक्षित किया गया था, जिसमें थल सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, मिसाइलें, बख्तरबंद गाड़ियां और सर्विलांस सिस्टम शामिल थे। लेकिन इस विशाल ऑर्डर पाइपलाइन के उत्साह के तुरंत बाद बाजार में ‘खबर पर खरीदारी और हकीकत पर बिकवाली’ (Buy on Rumour, Sell on News) का चक्र शुरू हो गया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में 8.5 प्रतिशत का गोता लगाने के बाद बुधवार की कमजोरी ने कुल गिरावट को 10 प्रतिशत के गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया।
अपोलो माइक्रो और एमटीएआर में 5% तक की तेज गिरावट: बीईएल और अस्त्रा माइक्रोवेव ने दिखाई मजबूती
बुधवार के कारोबारी सत्र में निफ्टी डिफेंस इंडेक्स की संरचना पर नजर डालें तो इंडेक्स में शामिल कुल 19 प्रमुख कंपनियों में से 15 से अधिक शेयर गहरे लाल निशान में गोता लगा रहे थे। सबसे ज्यादा बिकवाली मिडकैप और स्मॉलकैप डिफेंस कंपोनेंट विनिर्माताओं में देखने को मिली। अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि एमटीएआर टेक्नोलॉजीज का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। औद्योगिक विस्फोटकों और मिसाइल प्रोपल्शन के क्षेत्र में सक्रिय सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी 3 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट देखने के बावजूद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) जैसे दिग्गज पीएसयू स्टॉक्स निचले स्तरों से स्मार्ट रिकवरी दिखाने और अपने इंट्राडे नुकसान का बड़ा हिस्सा पाटने में सफल रहे।
वहीं दूसरी ओर, बाजार के इस चौतरफा नकारात्मक रुख के विपरीत दो प्रमुख कंपनियों—भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और अस्त्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स—ने विपरीत दिशा में कारोबार करते हुए निवेशकों को सुखद आश्चर्यचकित किया। डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार निर्माण की महारत्न कंपनी बीईएल के शेयर में एक प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया, जबकि वायरलेस और रडार सब-सिस्टम बनाने वाली अस्त्रा माइक्रोवेव के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई। इन दोनों शेयरों में आई मजबूती ने यह संकेत दिया कि निवेशक अब रक्षा क्षेत्र में अंधाधुंध खरीदारी के बजाय उन चुनिंदा कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनकी ऑर्डर बुक पूरी तरह मजबूत है और जिनका वैल्यूएशन अभी भी ऐतिहासिक औसत के आसपास बना हुआ है।
HSBC ने जारी की व्यापक रिसर्च रिपोर्ट: लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल ग्रोथ पर कायम भरोसा
डिफेंस शेयरों में चल रहे इस अल्पकालिक दबाव और तीव्र मूल्य करेक्शन के बीच वैश्विक वित्तीय फर्म एचएसबीसी (HSBC) ने भारतीय डिफेंस सेक्टर पर अपनी विस्तृत कवरेज रिपोर्ट जारी की है। एचएसबीसी ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा गिरावट बुनियादी कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि अत्यधिक खिंचे हुए वैल्यूएशंस (Stretched Valuations) का एक स्वाभाविक और स्वस्थ तकनीकी सुधार है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, भारत में रक्षा पूंजीगत व्यय (Capex) का एक मल्टी-ईयर यानी कई वर्षों तक चलने वाला संरचनात्मक चक्र शुरू हो चुका है, जिसे घरेलू आधुनिकीकरण और वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते भारतीय रक्षा निर्यातों का अभूतपूर्व समर्थन हासिल है। सरकार का आयात प्रतिस्थापन पर कड़ा फोकस और मित्र देशों को स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्यात आने वाले वर्षों में इन कंपनियों के राजस्व और एबिटा मार्जिन को लंबी अवधि तक मजबूती प्रदान करेगा।
एचएसबीसी की तकनीकी रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस विनिर्माण, आधुनिक मिसाइल प्रणालियों और विशेष रूप से अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (ड्रोन व काउंटर-ड्रोन तकनीक) में आने वाले समय में विशाल ऑर्डर चक्र की रफ्तार और तेज होगी। इसी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एचएसबीसी ने रक्षा क्षेत्र के प्रमुख शेयरों पर अपनी विस्तृत रेटिंग जारी की है। ब्रोकरेज ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) पर अपनी शीर्ष पसंद जाहिर करते हुए ‘Buy’ (खरीदारी) की रेटिंग दी है। वहीं दूसरी ओर, हालिया महीनों में तूफानी तेजी देख चुके शेयरों—भारत डायनेमिक्स (BDL), अस्त्रा माइक्रोवेव, डेटा पैटर्न्स (Data Patterns) और सोलर इंडस्ट्रीज—पर सीमित अपसाइड को देखते हुए ‘Hold’ (बनाए रखें) की राय शुरू की है। इसके अतिरिक्त, शिपबिल्डिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स पर अत्यधिक उच्च मूल्यांकन और संभावित मार्जिन दबाव का हवाला देते हुए ‘Reduce’ (हिस्सेदारी घटाने) की सिफारिश के साथ कवरेज शुरू की गई है।
निवेशकों के लिए आगे की राह: क्या डिफेंस शेयरों में खरीदारी का यह सही समय है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स में पिछले पांच दिनों के भीतर आई 10 प्रतिशत की यह गिरावट उन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक बेहतर प्रवेश बिंदु (Entry Opportunity) प्रस्तुत कर सकती है जो पिछले एक साल से डिफेंस शेयरों में आई ऐतिहासिक रैली के कारण साइडलाइन पर बैठे हुए थे। ₹1.10 लाख करोड़ के डीएसी प्रस्तावों का धरातल पर उतरना और आने वाले बजट सत्रों में रक्षा आधुनिकीकरण के लिए बढ़े हुए पूंजीगत आवंटन यह सुनिश्चित करते हैं कि कंपनियों की ऑर्डर-टू-बिल रेश्यो ऐतिहासिक रूप से मजबूत बनी रहेगी। हालांकि, विश्लेषकों ने छोटे निवेशकों को आगाह किया है कि वे एकमुश्त बड़ी पूंजी लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक ट्रांसफर या एसआईपी (SIP) माध्यम से किस्तों में खरीदारी की रणनीति अपनाएं, क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तिमाही वित्तीय नतीजों से पहले बाजार में कुछ और समय तक सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।









