बीज गोला बनाबो-जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” महाअभियान की शुरुआत

रायपुर, 16 जून 2026

पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। जिले में व्यापक जनभागीदारी के साथ “बीज गोला बनाबो-जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” महाअभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अनूठी मुहिम के तहत आगामी 18 जून 2026 को जिले के विभिन्न चिन्हांकित स्थलों पर एक ही दिन में लगभग 2 लाख सीड बॉल (बीज गोले) तैयार करने का एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है।

यह अभियान प्रकृति संरक्षण और वन संवर्धन की दिशा में राज्य के सबसे बड़े सामुदायिक प्रयासों में से एक साबित होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए महाअभियान के तहत सीड बॉल (बीज के गोले) बनाने का विशाल लक्ष्य तय किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में मानसून से पहले व्यापक स्तर पर सीड बॉल तैयार करके हरियाली बढ़ाने की अनूठी पहल शुरू हुई है।

क्या है सीड बॉल तकनीक और क्यों है खास

विशेषज्ञों के अनुसार, सीड बॉल (बीज गोला) एक ऐसी वैज्ञानिक व पारंपरिक तकनीक है जिसमें बीजों को मिट्टी, खाद और पोषक तत्वों के मिश्रण में लपेटकर एक सुरक्षित गोला बना दिया जाता है। इस तकनीक से बीजों को कीड़े-मकौड़ों और कड़े मौसम से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। मानसून (वर्षा ऋतु) की पहली फुहार पड़ते ही ये बीज गोले अपने आप सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पौधों के अंकुरित होने और उनके जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए पहाड़ों और दुर्गम वन क्षेत्रों में भी आसानी से पौधरोपण किया जा सकता है।

इन प्रमुख स्थलों पर आयोजित होंगे कार्यक्रम

हरित जशपुर के निर्माण के लिए जिले के इन प्रमुख केंद्रों पर व्यापक स्तर पर सीड बॉल निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।, जिनमें भैरव पहाड़, सोगड़ा (जशपुर), नुमान टेकरी, कुनकुरी (शहरी क्षेत्र), ग्राम कुनकुरी और पत्थलगांव शामिल हैं।

समाज के हर वर्ग की दिखेगी भागीदारी

इस कार्यक्रम को केवल सरकारी आयोजन न बनाकर एक जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। 18 जून को होने वाले इस महायज्ञ में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं (छळव्े), वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिक भी अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराएंगे।

एक बीज, लाखों उम्मीदें

इस अभियान की मूल भावना “एक बीज, लाखों उम्मीदें” पर आधारित है, जिसका मकसद आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त हरा-भरा पर्यावरण सौंपना है। जशपुर जिला प्रशासन और वन विभाग ने जिले के सभी नागरिकों, प्रबुद्धजनों और युवाओं से अपील की है कि वे 18 जून को अधिक से अधिक संख्या में अपने नजदीकी केंद्रों पर पहुंचकर इस प्रकृति संरक्षण अभियान का हिस्सा बनें और जशपुर को हरियाली की एक नई वैश्विक पहचान दिलाने में अपना बहुमूल्य योगदान दें।

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