
मप्र हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने भोपाल-देवास फोरलेन पर फास्टैग के जरिए वसूले गए अधिक टोल को अवैध करार दिया है।
डिवीजन बेंच ने कंपनी को वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को 11 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है. कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करानी होगी।
कोर्ट ने FASTag ओवरचार्जिंग के लिए टोल फर्म को जिम्मेदार ठहराया
यह याचिका मेसर्स देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी। याचिका में मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा जारी 21 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें वर्ष 2022 में वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने का निर्देश दिया गया था।
कंपनी ने कहा कि FASTag सिस्टम में थ्री-एक्सल बसों को मल्टी-एक्सल माना जाता था। इससे FASTag से ज्यादा पैसे कटते थे. कंपनी ने दावा किया कि वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि टेक्नोलॉजी सुविधा तो देती है, लेकिन वह कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को नहीं बदल सकती.
यदि सॉफ्टवेयर में गलत मैपिंग हुई तो इसके लिए टोल कंपनी जिम्मेदार होगी। डिवीजन बेंच ने पाया कि समझौते में कहीं भी तीन-एक्सल बसों को मल्टी-एक्सल ट्रक मानने की अनुमति नहीं दी गई थी। बसों के लिए अलग टोल दर पहले से ही तय थी। इसके बावजूद कंपनी ने फास्टैग के जरिए थ्री-एक्सल बसों से ज्यादा टोल वसूला। इसी आधार पर अधिक वसूली गयी रकम वापस करने का आदेश दिया गया है.






