September 19, 2026 11:08 pm

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रूसी हमले के खौफ में यूरोप: मेडिकल बंकर एक्टिव, हेल्थ बजट में कटौती और NATO 3.0 की महातैयारी

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के बीच पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सीधे सैन्य टकराव की आशंका गहराने लगी है। हालात इस कदर तनावपूर्ण हो चुके हैं कि अब केवल सीमाओं पर हथियारों की तैनाती तक ही तैयारी सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन से जुड़े स्वास्थ्य बजट में कटौती करने से लेकर दशकों पुराने भूमिगत मेडिकल बंकरों को दोबारा सक्रिय करने जैसे असाधारण कदम उठाए जा रहे हैं। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के सभी 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुखों का दो दिवसीय आपातकालीन महामंथन शुरू हो चुका है। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन की कमान इटली के वरिष्ठ नौसेना अधिकारी एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने के हाथों में है। बैठक का एकमात्र और सबसे बड़ा एजेंडा यह है कि अगर रूस के साथ किसी भी समय सीधा युद्ध छिड़ता है, तो पूरा यूरोप एक संयुक्त मोर्चे के तौर पर किस प्रकार अपनी रक्षा करेगा, सैन्य तकनीकों में त्वरित निवेश कैसे सुनिश्चित किया जाएगा और यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के कैसे जारी रखी जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार यूरोप को अपनी सुरक्षा का वित्तीय बोझ स्वयं उठाने की दो-टूक चेतावनी दिए जाने के बाद इस सैन्य गठबंधन ने अपनी संपूर्ण रणनीतिक दिशा में व्यापक बदलाव किया है। पश्चिमी रक्षा हलकों में इस बड़े नीतिगत बदलाव को ‘नाटो 3.0’ (NATO 3.0) का नाम दिया जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, नाटो के कुल सामूहिक सैन्य खर्च का 57 प्रतिशत भारी-भरकम हिस्सा अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका वहन करता आ रहा है। इस अत्यधिक निर्भरता के कारण वॉशिंगटन पर हमेशा अतिरिक्त आर्थिक और सामरिक दबाव बना रहता था।

अब नाटो 3.0 के नए ढांचे के तहत यूरोपीय देशों को अपनी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर उठानी होगी। अमेरिका का मुख्य सामरिक फोकस अब हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में केंद्रित हो रहा है, जहां उसे चीन की बढ़ती आर्थिक और नौसैनिक चुनौतियों से निपटना है। हालांकि, नए शक्ति संतुलन के बावजूद यूरोप में नाटो का सर्वोच्च सैन्य कमांडर (Supreme Allied Commander) हमेशा की तरह एक अमेरिकी जनरल ही रहेगा। इसके साथ ही ब्रिटेन और फ्रांस के स्वतंत्र परमाणु हथियारों के जखीरे (Nuclear Deterrence) पहले की तरह ही यूरोप की सुरक्षा गारंटी के प्रमुख आधार बने रहेंगे।

नाटो के सदस्य देशों ने भविष्य के खतरों को भांपते हुए साल 2035 तक अपनी कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर राष्ट्रीय रक्षा और आंतरिक सुरक्षा पर खर्च करने का ऐतिहासिक और कड़ा लक्ष्य तय किया है। वित्तीय खाके के तहत, इस 5 प्रतिशत में से 3.5 प्रतिशत हिस्सा आधुनिक लड़ाकू हथियारों, मिसाइल प्रणालियों और गोला-बारूद की प्रत्यक्ष खरीद पर लगाया जाएगा, जबकि शेष 1.5 प्रतिशत आवंटन विशेष सुरक्षा बुनियादी ढांचे, सुरक्षित संचार लाइनों और लॉजिस्टिक्स के निर्माण के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।

इस विशाल रक्षा बजट को पूरा करने के लिए यूरोपीय देशों को अपने घरेलू बजट में अत्यंत अप्रिय और कठोर आर्थिक फैसले लेने पड़ रहे हैं। नीदरलैंड्स जैसे विकसित और कल्याणकारी देश ने अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं में भारी कटौती करने का आधिकारिक प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, रक्षा जरूरतों की पूर्ति के लिए नए टैक्स लगाकर सालाना 54 हजार करोड़ रुपये (लगभग 6.5 अरब डॉलर) से अधिक का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की ठोस योजना बनाई जा रही है, जिससे नागरिकों को मिलने वाली रियायतों पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

रूस के साथ भविष्य में संभावित महायुद्ध की आहट को देखते हुए प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने जमीनी स्तर पर अपनी नागरिक सुरक्षा और रक्षा उत्पादन प्रणाली को युद्ध स्तर पर ढालना शुरू कर दिया है:

  • जर्मनी की बंकर रणनीति: शीतयुद्ध के दौर में साल 1979 में बनाए गए और बाद में पूरी तरह ठप पड़े भूमिगत मेडिकल बंकरों को जर्मनी अब तेजी से खाली करवाकर अत्याधुनिक जीवन रक्षक प्रणालियों के साथ फिर से चालू कर रहा है, ताकि आपातकालीन स्थिति में बड़े पैमाने पर हताहतों का इलाज किया जा सके।

  • ब्रिटेन का मिसाइल और एम्युनिशन मिशन: यूनाइटेड किंगडम ने अपने रक्षा उत्पादन को अभूतपूर्व गति देने के लिए गोला-बारूद और उच्च क्षमता वाले विस्फोटक बनाने की छह बिल्कुल नई फैक्ट्रियां स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही ब्रिटिश सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए घरेलू स्तर पर निर्मित 7,000 लंबी दूरी के अत्याधुनिक मिसाइल और रॉकेट हथियार खरीदने जा रही है।

  • पोलैंड का नागरिक सैन्य प्रशिक्षण मॉडल: रूस के सबसे नजदीकी पड़ोसियों में शामिल पोलैंड ने साल 2027 से हर साल 1 लाख आम नागरिकों को गहन सैन्य प्रशिक्षण देने का अनिवार्य कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत 5 लाख प्रशिक्षित नागरिकों की एक विशाल रिजर्व सेना खड़ी की जाएगी।

  • लिथुआनिया और स्वीडन की नागरिक चौकसी: बाल्टिक राष्ट्र लिथुआनिया ने 5,000 युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत सीधे सेना में तलब करना शुरू कर दिया है। वहीं, हाल ही में नाटो का सदस्य बने स्वीडन ने अपने सभी नागरिकों को आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर युद्ध या किसी भी बड़े संकट की स्थिति में कम से कम 7 दिनों तक बिना किसी सरकारी मदद के जिंदा रहने के लिए राशन, पानी और दवाओं का स्टॉक पहले से तैयार रखने का निर्देश दिया है।

यूरोपीय देशों की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उनकी सेनाएं पूरी तरह से अमेरिकी हथियार निर्माण कंपनियों पर निर्भर हैं। रक्षा आंकड़ों के अनुसार, 2016-20 की तुलना में पिछले कुछ वर्षों के भीतर यूरोप के हथियार आयात में 143 प्रतिशत का चौंकाने वाला उछाल दर्ज किया गया है। वर्तमान समय में नॉर्वे और इटली जैसे प्रमुख देश अपनी कुल सैन्य जरूरतों के 93 प्रतिशत हथियार केवल अमेरिका से खरीदते हैं।

इसके अलावा नीदरलैंड्स अपनी 89 प्रतिशत, ब्रिटेन 85 प्रतिशत और डेनमार्क 82 प्रतिशत हथियार आवश्यकताओं के लिए पेंटागन और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों पर आश्रित हैं। इस भारी निर्भरता ने संकट के समय यूरोप की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही मुख्य कारण है कि नाटो के यूरोपीय सदस्य अब अमेरिकी हथियारों के विकल्प के रूप में अपनी घरेलू हथियार फैक्ट्रियों, संयुक्त लड़ाकू विमान परियोजनाओं और स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को मजबूत कर रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की होड़ में जुट गए हैं।

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