September 19, 2026 12:30 pm

कन्फर्म टिकट पर नहीं कर पाए सफर तो कैंसिल कराने की जरूरत नहीं, इन 5 मामलों में बदल सकते हैं पैसेंजर का नाम

भारतीय रेल से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि महीनों पहले कराया गया ट्रेन का कन्फर्म टिकट ऐन वक्त पर किसी इमरजेंसी के कारण बेकार साबित होने लगता है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर यात्री घाटे से बचने के लिए टिकट कैंसिल करा देते हैं, जिससे रेलवे के नियमों के तहत भारी-भरकम कैंसिलेशन चार्ज कट जाता है और रिफंड की रकम आधी रह जाती है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि भारतीय रेलवे यात्रियों को अपना कन्फर्म टिकट किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने की विशेष कानूनी सुविधा प्रदान करता है। अगर आप खुद सफर करने की स्थिति में नहीं हैं, तो टिकट रद्द कराने के बजाय यात्री का नाम बदलकर यात्रा को सुरक्षित रख सकते हैं।

रेलवे नियमों के मुताबिक, यदि किसी यात्री के पास कन्फर्म टिकट है और वह किसी कारणवश यात्रा नहीं कर पा रहा है, तो वह अपना टिकट अपने परिवार के सीधे सदस्यों के नाम ट्रांसफर करा सकता है। इसमें माता, पिता, भाई, बहन, पुत्र, पुत्री, पति या पत्नी शामिल हैं। यह सुविधा केवल उन्हीं पारिवारिक सदस्यों के लिए मान्य है जिनका आपसे सीधा रक्त संबंध या वैवाहिक रिश्ता हो। किसी दूर के रिश्तेदार या दोस्त के नाम पर यह सामान्य पारिवारिक श्रेणी लागू नहीं होती।

यदि आप किसी केंद्र सरकार, राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के कर्मचारी हैं और आपने अपनी यात्रा के लिए टिकट बुक कराया था, लेकिन अचानक प्रशासनिक कार्य या सरकारी ड्यूटी के चलते आपको दौरा रद्द करना पड़ा, तो आपका टिकट आपकी जगह उसी विभाग के किसी अन्य सहकर्मी के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी किया गया औपचारिक पत्र आवश्यक होता है।

यदि किसी शादी, बारात या बड़े पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए सामूहिक रूप से (पार्टी टिकट) टिकट बुक कराए गए हैं और ऐन वक्त पर कोई सदस्य नहीं जा पा रहा है, तो उस ग्रुप के मुखिया या पार्टी हेड के लिखित आवेदन पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम टिकट में जोड़ा या बदला जा सकता है। इससे पूरे ग्रुप का रिजर्वेशन प्रभावित नहीं होता और यात्रा सुचारू रहती है।

नेशनल कैडेट कोर (NCC) के कैडेट्स या किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय के छात्रों के सामूहिक शैक्षिक भ्रमण के दौरान यह नियम बेहद मददगार साबित होता है। यदि किसी छात्र या कैडेट की तबीयत खराब हो जाए या वह जाने में असमर्थ हो, तो संस्था के प्रधानाचार्य, हेडमास्टर या एनसीसी के अधिकृत अधिकारी के अनुमोदन पर दूसरे छात्र का नाम उस टिकट पर दर्ज कराया जा सकता है।

यदि किसी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त खेल महासंघ के एथलीट या खेल टीम के सदस्य यात्रा कर रहे हैं और टीम का कोई खिलाड़ी चोटिल या अनुपस्थित हो जाता है, तो टीम मैनेजर या अधिकृत खेल संस्था के पत्र के आधार पर उस खिलाड़ी का रिजर्वेशन किसी रिजर्व खिलाड़ी के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है।

ट्रेन का टिकट ट्रांसफर कराने के लिए कुछ अनिवार्य नियमों और समय सीमा का पालन करना होता है:

  • समय सीमा: पारिवारिक सदस्यों, सरकारी कर्मचारियों और खेल दलों के लिए ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से कम से कम 24 घंटे पहले आवेदन करना जरूरी होता है। वहीं, शादी समारोह या छात्रों के ग्रुप टिकट के मामले में ट्रेन छूटने से 48 घंटे पहले आवेदन देना होता है।

  • प्रक्रिया: टिकट धारक को अपने मूल कन्फर्म टिकट का प्रिंटआउट (काउंटर या ई-टिकट), अपना पहचान पत्र और जिसके नाम टिकट ट्रांसफर होना है उसका मूल पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी) और पारिवारिक संबंध का प्रमाण (राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर आदि) लेकर नजदीकी रेलवे स्टेशन के मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक (CRS) या रिजर्वेशन काउंटर पर जाना होता है।

  • शर्त: रेलवे यह सुविधा पूरे टिकट जीवनकाल में केवल एक बार ही प्रदान करता है। एक बार नाम बदलने के बाद उसे दोबारा किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

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