October 3, 2026 4:46 am

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क्या UPI से दूर हो रहे हैं लोग? 15 अक्टूबर से चार्ज की चर्चा के बीच सितंबर में 1.8% गिरा ट्रांजैक्शन, जानें आंकड़ों का असली सच

भारतीय डिजिटल भुगतान की लाइफलाइन बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के हालिया मासिक आंकड़ों ने वित्तीय और तकनीकी जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी कुल वैल्यू दोनों में पिछले महीने यानी अगस्त की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारियों और उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। बाजार में यह धारणा बनने लगी है कि क्या चार्ज लगने के डर से लोग अब यूपीआई से दूरी बनाने लगे हैं। हालांकि, जब इन आंकड़ों का गहराई से तकनीकी और सांख्यिकीय विश्लेषण किया जाता है, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है।

एनपीसीआई के आधिकारिक डैशबोर्ड के मुताबिक, सितंबर में यूपीआई के कुल लेन-देन का ब्योरा इस प्रकार रहा:

  • ट्रांजैक्शन वॉल्यूम (लेन-देन की कुल संख्या): अगस्त में यूपीआई के जरिए रिकॉर्ड 24.51 बिलियन (2,451 करोड़) ट्रांजैक्शन हुए थे। सितंबर में यह संख्या 1.8% घटकर 24.07 बिलियन (2,407 करोड़) रह गई।

  • ट्रांजैक्शन वैल्यू (कुल रकम): लेन-देन की कुल राशि में भी 1.50% की मामूली गिरावट आई। अगस्त में जहां ₹29.82 लाख करोड़ का लेन-देन हुआ था, वहीं सितंबर में यह आंकड़ा ₹29.37 लाख करोड़ दर्ज किया गया।

  • सालाना आधार पर मजबूत बढ़त (YoY Growth): मासिक गिरावट के बावजूद साल-दर-साल के पैमाने पर यूपीआई का दबदबा बरकरार है। सितंबर 2025 की तुलना में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 23% और ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18% का शानदार उछाल देखा गया है।

अर्थशास्त्रियों और फिनटेक विशेषज्ञों के अनुसार, इस 1.8% की गिरावट को यूपीआई के प्रति घटते रुझान के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।

इसके पीछे दो प्रमुख बुनियादी कारण हैं:

  • दिनों की संख्या का अंतर: अगस्त का महीना 31 दिनों का होता है, जबकि सितंबर केवल 30 दिनों का। यदि दैनिक औसत ट्रांजैक्शन (Daily Average Transactions) की तुलना करें, तो अगस्त में प्रतिदिन औसतन 79.1 करोड़ लेन-देन हो रहे थे, जबकि सितंबर में प्रतिदिन का औसत बढ़कर 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन तक पहुंच गया। यानी दैनिक आधार पर लेन-देन घटा नहीं बल्कि बढ़ा है।

  • दैनिक वैल्यू में उछाल: सितंबर में रोजाना का औसत टर्नओवर लगभग ₹97,913 करोड़ रहा, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ता रोजमर्रा के भुगतान में यूपीआई का पहले से ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

गिरावट की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल उस चार्ज को लेकर है जो 15 अक्टूबर से लागू होने की बात कही जा रही है। इसे लेकर आम जनता और छोटे दुकानदारों के बीच कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं:

  • आम उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह फ्री: एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) और आम पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर सामान्य जनता से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्राहक के बैंक खाते से सीधे होने वाला यूपीआई भुगतान हमेशा की तरह मुफ्त रहेगा।

  • बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर सीमित नियम: प्रस्तावित नियमों के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कमर्शियल भुगतानों पर 0.40% तक का टियर आधारित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है, जिसकी अधिकतम सीमा (Cap) तय की गई है।

  • व्यापारियों का विरोध: कई व्यापारी संगठनों ने मार्जिन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है और हाल ही में वित्त मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखी हैं, जिससे कुछ जगहों पर व्यापारियों द्वारा क्यूआर कोड हटाने या नकद मांगने की छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु या मुंबई जैसे बड़े शहरों में अक्टूबर के महीने से त्योहारी सीजन (दशहरा, दिवाली, धनतेरस और छठ) अपनी पूरी गति पकड़ेगा।

फेस्टिवल सीजन में खरीदारी, ई-कॉमर्स सेल्स, यात्रा टिकट बुकिंग और उपहारों के लेन-देन में भारी इजाफा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर का यह मामूली उतार-चढ़ाव केवल एक तकनीकी समायोजन है। अक्टूबर और नवंबर के महीनों में त्योहारी खरीदारी के दम पर यूपीआई एक बार फिर 25 बिलियन से अधिक के नए रिकॉर्ड स्तर को छूने की पूरी क्षमता रखता है।

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