
भारतीय रेलवे (Indian Railways) केवल एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क ही नहीं है, बल्कि इसके नाम कई ऐसे ऐतिहासिक और इंजीनियरिंग कीर्तिमान दर्ज हैं जो पूरी दुनिया को चकित कर देते हैं। एक समय था जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन को दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म का गौरव हासिल था, लेकिन अब यह प्रतिष्ठित ताज कर्नाटक के श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन (SSS Hubballi Junction) के नाम दर्ज हो चुका है। करीब 1.5 किलोमीटर से अधिक लंबे इस प्लेटफॉर्म की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर एक साथ दो पूर्ण-लंबाई वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें आसानी से खड़ी हो सकती हैं।
कर्नाटक के धारवाड़ जिले में स्थित हुबली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 की कुल लंबाई 1,507 मीटर (लगभग 1.507 किमी) है।
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विश्व कीर्तिमान की आधिकारिक मान्यता: मार्च 2023 में इस प्लेटफॉर्म के विस्तार कार्य के औपचारिक उद्घाटन के साथ ही ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness World Records) ने इसे आधिकारिक रूप से दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के रूप में प्रमाणित किया था।
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परियोजना की कुल लागत: दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) द्वारा हुबली यार्ड के आधुनिकीकरण और री-मॉडलिंग प्रोजेक्ट के तहत करीब ₹90 करोड़ से अधिक की लागत से इस पूरे स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म का विस्तार किया गया था।
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एक साथ दो ट्रेनों का संचालन: इस प्लेटफॉर्म की विशाल लंबाई के चलते रेलवे एक ही समय में दोनों दिशाओं (इलेक्ट्रिक और डीजल इंजनों) से दो 24-कोच वाली फुल-रैक ट्रेनों को बिना किसी बाधा के एक साथ खड़ा कर सकता है और यात्रियों को चढ़ा-उतार सकता है।
हुबली स्टेशन के इस विस्तार से पहले दुनिया के सबसे लंबे प्लेटफॉर्म्स की सूची में अन्य भारतीय स्टेशनों का दबदबा था, जिसे हुबली ने पीछे छोड़ दिया:
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1. श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली (कर्नाटक): 1,507 मीटर (वर्तमान में दुनिया में प्रथम स्थान)
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2. गोरखपुर जंक्शन (उत्तर प्रदेश): 1,366.33 मीटर (लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड धारक रहा)
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3. कोल्लम जंक्शन (केरल): 1,180.50 मीटर (भारत का तीसरा सबसे लंबा प्लेटफॉर्म)
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4. खड़गपुर जंक्शन (पश्चिम बंगाल): 1,072.50 मीटर (पूर्व में सबसे लंबा प्लेटफॉर्म रहा)
हुबली स्टेशन केवल अपनी लंबाई के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत के रेल यातायात का एक प्रमुख जीवनरेखा केंद्र (Lifeline Hub) है:
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दक्षिण पश्चिम रेलवे का मुख्यालय: यह स्टेशन दक्षिण पश्चिम रेलवे (South Western Railway – SWR) जोन का जोनल मुख्यालय भी है।
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प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक गलियारा: हुबली-धारवाड़ को कर्नाटक की दूसरी राजधानी और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र माना जाता है। यह स्टेशन बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, गोवा और पुणे को आपस में जोड़ने वाली प्रमुख रेलवे लाइनों का जंक्शन है।
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भीड़भाड़ से राहत और परिचालन दक्षता: इस 1.5 किमी लंबे प्लेटफॉर्म के निर्माण से पहले ट्रेनों को आउटर सिग्नल पर लंबे समय तक क्लीयरेंस का इंतजार करना पड़ता था। नए प्लेटफॉर्म और अतिरिक्त लूप लाइनों के चालू होने से ट्रेनों के क्रॉसिंग और टर्मिनल संचालन में लगने वाला समय काफी घट गया है।
प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे प्रशासन ने इसे एक आधुनिक ‘स्मार्ट स्टेशन’ का स्वरूप दिया है:
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यात्री सुगमता के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट: इतने लंबे प्लेटफॉर्म पर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और भारी सामान वाले यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए कई आधुनिक लिफ्ट, एस्केलेटर और बैटरी चालित बग्गी वाहन (Battery Operated Cars) की व्यवस्था की गई है।
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ग्रीन एनर्जी और सुरक्षा: प्लेटफॉर्म की विशाल शेड पर बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे स्टेशन की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होता है। इसके अलावा सुरक्षा के लिए पूरे 1.5 किमी के दायरे में हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है।
भारतीय रेलवे का यह इंजीनियरिंग कारनामा दर्शाता है कि देश का सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचा किस तरह वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रहा है।








