September 14, 2026 11:13 am

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पालधी-तारसोद बायपास हाईवे पर बड़ा हादसा: ओवरब्रिज की RI वॉल ढहने पर एक्शन में मध्य रेलवे; NHAI से मांगी तकनीकी रिपोर्ट

महाराष्ट्र के जलगांव जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 (NH-53) के अंतर्गत आने वाले पालधी-तारसोद बायपास हाईवे पर नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की आरआई वॉल (Reinforced Earth / Retaining Wall) अचानक भरभराकर ढह गई। इस गंभीर संरचनात्मक विफलता के बाद मध्य रेलवे (Central Railway) का भुसावल मंडल पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। गनीमत यह रही कि मलबे की चपेट में उस वक्त नीचे से गुजर रही कोई ट्रेन या ट्रैक पर काम कर रहे कर्मचारी नहीं आए, जिससे एक भीषण रेल दुर्घटना टल गई। हालांकि, व्यस्त रेल लाइन के ठीक पास सुरक्षा दीवार गिरने की इस घटना ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को कड़ा नोटिस जारी करते हुए तत्काल तकनीकी रिपोर्ट तलब की है।

यह घटना पालधी और तारसोद के बीच नवनिर्मित फोर-लेन बायपास हाईवे पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज के अप्रोच हिस्से पर घटी। बारिश और मिट्टी के भारी दबाव के चलते ओवरब्रिज को सहारा देने वाली कंक्रीट पैनल्स और मिट्टी से बंधी विशालकाय आरआई वॉल का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया।

  • ट्रैक के पास बिखरा मलबा: दीवार टूटने के साथ ही भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और कंक्रीट के बड़े ब्लॉक रेलवे लाइन के सुरक्षा दायरे (Railway Clear Zone) के बेहद नजदीक आ गिरे।

  • रेलवे कर्मियों में हड़कंप: घटना की सूचना मिलते ही भुसावल मंडल के इंजीनियरिंग, संरक्षा और ऑपरेटिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और ट्रैक की स्थिति का निरीक्षण किया।

  • गति प्रतिबंध (Speed Restrictions): एहतियात के तौर पर संबंधित रेल खंड से गुजरने वाली ट्रेनों की गति को नियंत्रित किया गया ताकि ट्रैक पर किसी भी प्रकार के कंपन से शेष दीवार को और नुकसान न पहुंचे।

रेलवे ट्रैक और यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न करते हुए मध्य रेलवे प्रशासन ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक और तकनीकी सलाहकारों को तलब किया है:

  • तकनीकी विफलता की जांच: रेलवे ने पूछा है कि इतने कम समय में नवनिर्मित ओवरब्रिज की रिटेनिंग वॉल कैसे धंस गई? क्या निर्माण के समय उचित ड्रेनेज (जल निकासी) और मिट्टी की सघनता (Compaction) का ध्यान नहीं रखा गया था?

  • स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट: रेलवे ने एनएचएआई को निर्देश दिया है कि वह पूरे बायपास और रेलवे ओवरब्रिज के सभी पिलर्स, अप्रोच रोड और दीवारों का एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट (Third-Party Safety Audit) आईआईटी या किसी प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान से कराए।

  • मलबा हटाने और स्थायी मरम्मत की समयसीमा: ट्रैक की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मलबे को तुरंत हटाने और मजबूत सुरक्षात्मक उपाय करने के लिए समयबद्ध कार्य योजना सौंपने को कहा गया है।

पालधी-तारसोद बायपास का निर्माण जलगांव शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने और यातायात को सुगम बनाने के लिए किया गया था। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उद्घाटन या संचालन के कुछ ही समय के भीतर इस तरह की बड़ी संरचनात्मक विफलता सामने आने से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।

  • स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और तकनीकी पर्यवेक्षण (Supervision) में भारी लापरवाही बरती गई।

  • यदि यह दीवार किसी व्यस्त समय में नीचे से एक्सप्रेस ट्रेन गुजरने के दौरान ढहती, तो यह एक राष्ट्रीय स्तर की बड़ी रेल त्रासदी में बदल सकती थी।

रेलवे के कड़े निर्देश और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद एनएचएआई के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी ने मौके पर पहुंचकर आपातकालीन बहाली कार्य शुरू कर दिया है:

  • मिट्टी का कटाव रोकने के उपाय: बारिश के पानी से मिट्टी को बहने से रोकने के लिए ढलान वाले हिस्से पर तिरपाल और सैंडबैग्स (रेत की बोरियां) लगाए जा रहे हैं।

  • अस्थायी बैरिकेडिंग: हाईवे पर यातायात को प्रभावित हिस्से से सुरक्षित दूरी पर डायवर्ट किया गया है ताकि ओवरब्रिज पर अत्यधिक वजन न पड़े।

  • जवाबदेही तय करने की मांग: विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार ठेकेदार और निगरानी करने वाले कंसल्टेंट इंजीनियरों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।

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