चित्रकोट की बदलती जलधारा और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रतिनिधियों ने बताया अविस्मरणीय अनुभव, छत्तीसगढ़ को पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश बताया
रायपुर, 16 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ पर्यटन को देश के पर्यटन बाजार में व्यापक पहचान दिलाने और राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत से देशभर के पर्यटन प्रतिनिधियों को परिचित कराने के उद्देश्य से 10 से 14 अगस्त 2026 तक आयोजित फैम टूर का सफल आयोजन हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कुल 48 पर्यटन प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें दक्षिण छत्तीसगढ़ अर्थात बस्तर क्षेत्र के भ्रमण में 30 प्रतिनिधि शामिल हुए। पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों, स्थानीय परंपराओं, साहसिक पर्यटन और आत्मीय आतिथ्य का करीब से अनुभव किया।
केशकाल घाटी से हुआ बस्तर की खूबसूरती का सफर
प्रतिनिधियों ने बस्तर के प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध केशकाल घाटी से बस्तर में प्रवेश किया। घने जंगलों, घुमावदार पहाड़ी मार्गों और चारों ओर फैली हरियाली के बीच से गुजरते हुए प्रतिनिधियों ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया। केशकाल घाटी ने उन्हें बस्तर के उस प्राकृतिक संसार की झलक दी, जहां जंगल, पहाड़ और घाटियां मिलकर अद्भुत पर्यटन अनुभव रचते हैं।
प्रतिनिधियों ने विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया। इंद्रावती नदी पर निर्मित यह भव्य जलप्रपात अपने विस्तृत जलप्रवाह और प्राकृतिक परिवेश के कारण प्रतिनिधियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। चित्रकोट की विशाल जलधारा और आसपास का मनोहारी प्राकृतिक दृश्य देखकर प्रतिनिधियों ने इसे अविस्मरणीय पर्यटन अनुभव बताया।
चित्रकोट को लेकर प्रतिनिधियों ने साझा किया अपना अनुभव
चित्रकोट जलप्रपात का अनुभव साझा करते हुए प्रतिनिधियों ने इसकी प्राकृतिक सुंदरता की विशेष सराहना की। उन्होने चित्रकोट के वातावरण को घूमने के लिए बेहद आकर्षक बताया और जलप्रपात के मनोहारी दृश्य को कैमरे में कैद करते हुए अपने अनुभव साझा किए।
चित्रकोट जलप्रपात को करीब से देखकर प्रतिनिधि इसकी सुंदरता से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यहां जलप्रपात और आसपास का प्राकृतिक दृश्य अलग-अलग समय में अलग रंग और रूप में दिखाई देता है। सूर्य की रोशनी में पानी की चमक और सफेद झाग जलप्रपात की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा कि चित्रकोट प्रकृति की सुंदरता को करीब से महसूस करने का शानदार पर्यटन स्थल है।
गेड़ी और परब नृत्य ने दिखाई बस्तर की जीवंत संस्कृति
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता के साथ प्रतिनिधियों को यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति से भी परिचित कराया गया। इस अवसर पर पारंपरिक गेड़ी नृत्य एवं परब नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों की धुन और कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन ने प्रतिनिधियों को बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति से रूबरू कराया।
प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिनिधियों ने महसूस किया कि बस्तर की पहचान केवल उसके जंगलों और जलप्रपातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोककलाएं, परंपराएं, नृत्य, संगीत और जनजातीय जीवनशैली भी पर्यटन की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
धुड़मारास में प्रकृति, रोमांच और जनजातीय जीवन का अनूठा संगम
प्रतिनिधियों ने कांगेर नदी और घने जंगलों के बीच बसे धुड़मारास गांव का रोमांचक अनुभव लिया। प्रकृति और जनजातीय जीवन के अनूठे मेल के लिए पहचान बना रहा धुड़मारास ग्रामीण पर्यटन की नई संभावनाओं को सामने लाता है।
प्रतिनिधियों ने यहां जनजातीय गृह-निवास का अनुभव लिया। स्थानीय समुदाय द्वारा पारंपरिक तरीके से पर्यटकों का स्वागत, मिट्टी और स्थानीय शैली से बने घरों में ठहरने का अनुभव, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और ग्रामीण जीवन को करीब से समझने का अवसर उनके लिए विशेष आकर्षण रहा।
स्थानीय हाट बाजार ने दिखाई आत्मनिर्भरता और संस्कृति की झलक
धुड़मारास में प्रतिनिधियों ने स्थानीय हाट बाजार का भी भ्रमण किया। यहां उन्हें स्थानीय उत्पादों, वन उपज, बांस से बने सामान, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को देखने और समझने का अवसर मिला। प्रतिनिधियों ने महसूस किया कि ऐसे बाजार स्थानीय समुदाय की आजीविका को पर्यटन से जोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक कला और संस्कृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
धुड़मारास में बांस की नाव से जल भ्रमण, नौकायन, जंगल भ्रमण और ग्राम भ्रमण जैसे साहसिक एवं प्रकृति आधारित अनुभवों ने फैम टूर को और अधिक रोमांचक बना दिया। यहां विकसित समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल यह दर्शाता है कि स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन के माध्यम से ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
समापन समारोह में प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
10 से 14 अगस्त तक आयोजित फैम टूर का 14 अगस्त को भव्य समापन हुआ। आयोजन में उत्तर छत्तीसगढ़ भ्रमण के 18 और दक्षिण छत्तीसगढ़ भ्रमण के 30, इस प्रकार कुल 48 पर्यटन प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
समापन समारोह में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, सम्माननीय अतिथिगण तथा पर्यटन मंडल के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में अपने अनुभव साझा किए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रकृति और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम है, जो इसे देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल करने की क्षमता रखता है। उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकोट की भव्यता, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और समुदाय आधारित पर्यटन अनुभवों की विशेष सराहना की।
देश के पर्यटन बाजार से छत्तीसगढ़ को जोड़ने की पहल
फैम टूर का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटन प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक पर्यटन क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव कराना रहा। प्रतिनिधियों ने यहां प्रकृति, संस्कृति, जनजातीय विरासत, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण जीवन और आतिथ्य को करीब से जाना। यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रतिनिधियों ने भविष्य में अपने-अपने क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा अधिक से अधिक पर्यटकों को राज्य की यात्रा के लिए प्रेरित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
फैम टूर ने चित्रकोट, बस्तर और धुड़मारास जैसे गंतव्यों को देश के पर्यटन प्रतिनिधियों के प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने और राज्य को एक प्रमुख, विविधतापूर्ण एवं आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मिला है। प्रकृति की भव्यता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता, रोमांच और आत्मीय आतिथ्य इन सभी अनुभवों के संगम ने फैम टूर के प्रतिभागियों के लिए छत्तीसगढ़ को केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यादगार यात्रा अनुभव के रूप में स्थापित किया।









