
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले करोड़ों संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अपने प्रोविडेंट फंड (PF) खाते की निगरानी रखना अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। नौकरीपेशा वर्ग की गाढ़ी कमाई का एक तय हिस्सा हर महीने पीएफ खाते में जमा होता है, जो न केवल रिटायरमेंट के बाद का वित्तीय सुरक्षा कवच बनता है बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में आर्थिक संबल भी प्रदान करता है। हाल के दिनों में ईपीएफओ ने डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देते हुए नियमों को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया है। देश भर के अलग-अलग औद्योगिक केंद्रों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई के कर्मचारियों के लिए क्लेम प्रोसेस की जटिलताओं को खत्म करने के मकसद से ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है। यदि आप भी किसी प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर संस्थान में वेतनभोगी कर्मचारी हैं, तो आपको ईपीएफओ के इन सभी 8 प्रमुख प्रावधानों की सटीक जानकारी होनी चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर क्लेम रिजेक्ट न हो।
ईपीएफओ ने आईटी सिस्टम को अपग्रेड करते हुए ऑटो मोड सेटलमेंट की शुरुआत की है। पहले जहां क्लेम पास होने में हफ्तों का समय लग जाता था, वहीं अब कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आधारित ऑटो-मोड से यह काम महज दो से तीन दिनों के अंदर पूरा हो जाता है। चिकित्सा आपातकाल, गंभीर बीमारी के इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा और विवाह जैसी परिस्थितियों के लिए शुरू की गई इस सुविधा की लिमिट को बढ़ाकर एक लाख रुपये तक कर दिया गया है। इस प्रक्रिया में किसी भी फील्ड ऑफिसर के मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती। सॉफ्टवेयर आपके ई-केवाईसी, आधार लिंक, बैंक अकाउंट विवरण और सेवा अवधि को ऑटो-वेरिफाई करता है और फंड सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाता है।
अक्सर कर्मचारियों के सामने ऐसी स्थिति आती है जब किसी कारणवश नौकरी छूट जाती है या कंपनी बंद हो जाती है। ऐसी विपरीत परिस्थिति में कर्मचारी के सामने नकदी का संकट खड़ा न हो, इसके लिए ईपीएफओ ने 75 फीसदी तक फंड निकालने की छूट दी है। नियम के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी एक महीने से अधिक समय तक बेरोजगार रहता है, तो वह अपने कुल जमा पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक एडवांस के रूप में निकाल सकता है। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर्मचारी का पीएफ खाता बंद नहीं होता और उसकी सदस्यता बरकरार रहती है। यदि व्यक्ति को अगले कुछ महीनों में नई नौकरी नहीं मिलती और बेरोजगारी की अवधि दो महीने पूरी हो जाती है, तो वह बचा हुआ 25 फीसदी बैलेंस भी निकालकर खाता पूरी तरह बंद कर सकता है।
पहले एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी में जाने पर कर्मचारियों को फॉर्म 13 भरकर पुराना पीएफ बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए लंबी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में अक्सर नियोक्ता (Employer) द्वारा डिजिटल सिग्नेचर के सत्यापन में देरी की वजह से ट्रांसफर महीनों अटका रहता था। ईपीएफओ ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के आधार पर ऑटो ट्रांसफर सिस्टम लागू कर दिया है। जैसे ही नया नियोक्ता आपकी जॉइनिंग की सूचना पोर्टल पर दर्ज करता है और आपकी पहली सैलरी से पीएफ अंशदान कटता है, पुरानी कंपनी का पीएफ बैलेंस अपने आप नए खाते में ट्रांसफर हो जाता है। इसके लिए केवल यह जरूरी है कि आपका यूएएन सक्रिय हो और आधार से सत्यापित बैंक खाता लिंक हो।
पीएफ खाते से निकासी के समय टैक्स से जुड़े नियमों की समझ होना बहुत जरूरी है। आयकर अधिनियम के तहत, यदि कोई कर्मचारी लगातार 5 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद पीएफ खाते से राशि निकालता है, तो उस पर किसी भी प्रकार का टैक्स या टीडीएस (TDS) नहीं कटता। यदि 5 साल से कम की सेवा में निकासी की जाती है और कुल राशि 50 हजार रुपये से अधिक है, तो पैन कार्ड लिंक होने पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाता है। पैन कार्ड लिंक न होने की स्थिति में यह कटौती अधिकतम टैक्स स्लैब दर से हो सकती है। अगर कर्मचारी ने 5 साल के भीतर कई कंपनियां बदली हैं लेकिन हर बार पीएफ राशि को ट्रांसफर कराया है, तो उन सभी कंपनियों की कुल सेवा अवधि को जोड़कर 5 साल की गणना की जाती है।
ईपीएफओ ने सभी खाताधारकों के लिए ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। बिना नॉमिनेशन के सदस्य की असमय मृत्यु होने की दशा में परिवार या कानूनी उत्तराधिकारियों को फंड और पेंशन क्लेम करने में अदालती और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। मेंबर सेवा पोर्टल पर जाकर सदस्य अपनी पत्नी, बच्चों या माता-पिता का आधार विवरण और फोटो अपलोड करके चंद मिनटों में ई-नॉमिनेशन पूरा कर सकते हैं। नॉमिनेशन दर्ज होने से भविष्य में क्लेम सेटलमेंट बेहद तेज गति से बिना किसी कानूनी विवाद के पूरा हो जाता है।
पीएफ खाते में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का 12-12 प्रतिशत अंशदान जाता है। नियोक्ता के 12 फीसदी हिस्से में से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) में जमा होता है, जबकि 3.67 फीसदी हिस्सा पीएफ खाते में जाता है। 58 वर्ष की आयु पूरी होने और कम से कम 10 वर्ष की नियमित अंशदायी सेवा पूरी करने के बाद कर्मचारी मासिक पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। इसके अलावा, कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत खाताधारक को सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर 7 लाख रुपये तक का मुफ्त जीवन बीमा कवर मिलता है, जिसके लिए कर्मचारी को अपनी जेब से कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं देना पड़ता।
घर खरीदने, मकान निर्माण, होम लोन चुकाने, बच्चों की उच्च शिक्षा या परिवार में शादी के लिए पीएफ से आंशिक निकासी (Non-refundable Advance) की अनुमति दी गई है। इन मामलों में सेवा की न्यूनतम अवधि निर्धारित है; जैसे शादी या शिक्षा के लिए कम से कम 7 साल की सेवा और मकान निर्माण के लिए 5 साल की सेवा जरूरी है। इन सभी लेन-देन और ब्याज क्रेडिट का पूरा ब्योरा ईपीएफओ की डिजिटल पासबुक पोर्टल या उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप के जरिए कभी भी देखा जा सकता है। हर वित्तीय वर्ष के अंत में मिलने वाला चक्रवृद्धित ब्याज समय पर खाते में अपडेट हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित निगरानी करते रहना हर जागरूक खाताधारक के लिए जरूरी है।









