गोबर गैस संयंत्रों के पुनर्जीवन से ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई गति

रायपुर, 15 जून 2026

गोबर गैस संयंत्रों का पुनर्जीवन ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक बेहद प्रभावी कदम है। यह गांवों को एलपीजी (LPG) पर निर्भरता से मुक्त कर पर्यावरण-अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए उत्तम जैविक खाद प्रदान करता है।  राज्य में बायोगैस संयंत्रों के पुनर्जीवन और प्रभावी संचालन की यह पहल ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर गांवों की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

बड़े देवगांव स्थित  गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्र को पुनः क्रियाशील

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ, सस्ती और सतत ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रायगढ़ जिले के ग्राम बड़े देवगांव (जनपद पंचायत खरसिया) स्थित गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्र को पुनः क्रियाशील किया गया है। यह पहल राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, जैविक अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन और ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

बायोगैस से चूल्हा संचालित कर गैस परीक्षण पूरी तरह सफल

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ के मार्गदर्शन में संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्रेडा की तकनीकी टीम, जिला पंचायत के अधिकारी तथा ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से संयंत्र की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य संपन्न किए। इसके बाद संयंत्र को सफलतापूर्वक पुनः चालू कर बायोगैस से चूल्हा संचालित कर गैस आपूर्ति की गुणवत्ता और कार्यक्षमता का परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।

घरेलू ईंधन की सुलभ उपलब्धता होगी सुनिश्चित

अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए बायोगैस संयंत्रों के नियमित रखरखाव, तकनीकी परीक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे ग्रामीण परिवारों को घरेलू ईंधन की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित होगी, एलपीजी पर निर्भरता घटेगी तथा ऊर्जा व्यय में कमी आएगी।

गोबर और जैविक अपशिष्टों से बनेगा बायोगैस

बायोगैस संयंत्र न केवल स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराते हैं, बल्कि गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों के प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

ग्रामीणों को मिलेगी स्वच्छ ईंधन की सुविधा

इस अवसर पर हितग्राहियों एवं ग्रामीणों को संयंत्र के नियमित संचालन, गोबर की निर्धारित मात्रा में आपूर्ति, पाइपलाइन की समय-समय पर जांच तथा तकनीकी समस्याओं की त्वरित सूचना देने संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी गई। ग्रामीणों ने संयंत्र के पुनः शुरू होने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिलेगी, पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और घरेलू खर्च में बचत होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

R No. 13843/ 75

Advertisement Carousel

Your Opinion

Will Donald Trump's re-election as US President be beneficial for India?
error: Content is protected !!