रायपुर, 31 अगस्त 2026
जब इरादे नेक हों और सोच दूरदर्शी, तो सरकारी सहायता योजनाएं केवल जीवनयापन का साधन नहीं बनतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की तकदीर बदलने का जरिया बन जाती हैं।छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी श्महतारी वंदन योजनाश् का ऐसा ही एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय उदाहरण बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में देखने को मिल रहा है। नारायणपुर नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 की निवासी श्रीमती जय ललिता कश्यप ने अपनी 5 वर्षीय लाडली बेटी सुकृति कश्यप के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने की एक अनुठी और सराहनीय मिसाल कायम की है।
योजना की राशि से बेटी का संवरता बचपन
अप्रैल 2024 से महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता को दैनिक खर्चों में उड़ाने के बजाय, जय ललिता और उनके पति गजेंद्र कश्यप ने एक दूरगामी निर्णय लिया। उन्होंने इस राशि का सीधा रुख अपनी बेटी के सुखद भविष्य की ओर मोड़ दिया।
जय ललिता ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि से पोस्ट ऑफिस में बेटी सुकृति के नाम से सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया और उसमें नियमित रूप से मासिक बचत जमा करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बेटी के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना हर माता-पिता का सपना होता है।
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से हमें अपनी बेटी की पढ़ाई और करियर के लिए अभी से एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने का अवसर मिला है। आज की यह छोटी-छोटी बचत कल सुकृति के सपनों को पूरा करने में बहुत बड़ी मददगार साबित होगी।
सुकन्या समृद्धि योजना-बेटियों के सपनों को पंख देने की पहल
सुकन्या समृद्धि योजना भारत सरकार की एक ऐसी बचत योजना है जो बालिकाओं की शिक्षा, उच्च अध्ययन और शादी के लिए एक निश्चित और सुरक्षित फंड तैयार करती है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता का सुकन्या समृद्धि योजना में पुनर्निवेश (त्मपदअमेजउमदज) कर कश्यप परिवार ने वित्तीय प्रबंधन का एक अनुठा मॉडल पेश किया है।
जय ललिता कश्यप की यह पहल केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की उन माताओं के लिए एक पथ-प्रदर्शन है जो अपनी बेटियों को सशक्त देखना चाहती हैं। सरकारी योजनाओं के मिले इस लाभ का ऐसा रचनात्मक और दूरदर्शी उपयोग बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।









