
Maharashtra Freedom of Religion Act: देवेंद्र फणडवीस सरकार ने राज्य में ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। यह कानून रक्षा बंधन के पावन अवसर पर यानी 28 अगस्त से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगा। इस संबंध में सरकार की ओर से राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। खास बात यह है कि यह कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा।
इस कानून के तहत राज्य में जबरन, धोखेबाजी, प्रलोभन या शादी के जरिये कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा। महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम के तहत बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, मिथ्या प्रस्तुतीकरण या विवाह से जुड़े छल के माध्यम से कराए गए धर्मांतरण को दंडनीय अपराध बनाया गया है। ऐसे मामलों में 7 साल तक की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं, इस अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है।
धर्म बदलने से 60 दिन पहले प्राधिकारी को बताना होगा
वहीं नए कानून के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को अपनाने की इच्छा रखता है तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकारी के सामने आवेदन देना होगा।
बच्चों से जुड़ा अहम प्रावधान क्या?
इसके अलावा, इस कानून का एक अहम प्रावधान अंतरधार्मिक विवाह और उससे जुड़े बच्चों के धर्म को लेकर भी है। कानून के अनुसार, अगर किसी गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के बाद हुई शादी या रिश्ते से बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे का धर्म वही माना जाएगा, जो उसकी मां शादी या रिश्ते से पहले मानती थी।
महाराष्ट्र सरकार ने राजपत्र अधिसूचना में कहा है कि राज्यपाल के आदेश से महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 (महा. 47 ऑफ 2026) की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 28 अगस्त 2026 को वह तारीख निर्धारित की गई है, जिस दिन से यह अधिनियम लागू होगा।









