CG : जशपुर की नाशपाती ने बदली किसानों की तकदीर, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग

CG : जशपुर की नाशपाती ने बदली किसानों की तकदीर, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग

3,500 से अधिक किसान कर रहे उत्पादन, सालाना लाखों की आमदनी से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

रायपुर, 18 मई 2026

जशपुर की नाशपाती ने बदली किसानों की तकदीर, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग

कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाला जशपुर अब नाशपाती उत्पादन के लिए नई पहचान बना रहा है। पहाड़ों और हरियाली से घिरे इस आदिवासी अंचल की नाशपाती अब छत्तीसगढ़ की सीमाएं पार कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और ओडिशा जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। जिले के हजारों किसानों के लिए नाशपाती की खेती आज आर्थिक समृद्धि का बड़ा जरिया बन चुकी है।

जशपुर की नाशपाती ने बदली किसानों की तकदीर, दूसरे राज्यों में बढ़ी मांग

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को फलोत्पादन की ओर प्रोत्साहित करने के प्रयासों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहा है। उद्यान विभाग और READS NGO (रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसायटी) द्वारा नाबार्ड के सहयोग से किसानों को आधुनिक बागवानी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यही वजह है कि जशपुर जिले में नाशपाती उत्पादन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

वर्तमान में जिले के लगभग 3,500 किसान करीब 3,500 एकड़ क्षेत्र में नाशपाती की खेती कर रहे हैं। इन बागानों से हर साल लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर नाशपाती के बाग विकसित किए गए हैं।

इन इलाकों से तैयार नाशपाती को कैरेट में पैक कर सीधे दूसरे राज्यों के बाजारों तक भेजा जाता है। जशपुर की नाशपाती अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण व्यापारियों की पहली पसंद बनती जा रही है। किसानों और व्यापारियों के मुताबिक बाहरी राज्यों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

नाशपाती की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। किसानों को प्रति एकड़ सालाना एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर फलोत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

उद्यान विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को नाशपाती क्षेत्र विस्तार के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। किसानों को पौधरोपण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक तकनीक से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। जशपुर की नाशपाती अब केवल एक फल नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, आत्मनिर्भरता और बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई पहचान बनती जा रही है।

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