
Maharashtra Freedom of Religion Act: महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 28 अगस्त 2026, यानी रक्षाबंधन से लागू होगा। इसके लिए राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब इस पर महंत सुधीर दास ने कहा कि राज्य में लव जिहाद हो या धर्म परिवर्तन, इस तरह के हथकंडे बड़ी मात्रा में चल रहे थे। जिहादी मानसिकता वाले लोग महिलाओं को बहला-फुसलाकर अपना गोरख धंधा चला रहे थे, लेकिन अब इस पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपनी बहनों को राखी गिफ्ट देने जा रहे हैं। 28 अगस्त से लागू होने वाले धर्म स्वतंत्रता कानून के तहत लव जिहाद पर सख्त लगाम कसी जाएगी।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए भी बताना होगा- महंत
महंत जी ने आगे कहा कि जबरन धर्मांतरण से उत्पन्न होने वाले विवादों का निवारण इस कानून के तहत सुनिश्चित किया जाएगा। अब स्वेच्छा से भी धर्म परिवर्तन करने के लिए 60 दिन पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होगा, जिसकी जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
‘अंतरधार्मिक विवाहों से पैदा हुए बच्चों के लिए भी प्रावधान’
साथ ही इस कानून में अंतरधार्मिक विवाहों से पैदा हुए बच्चों के लिए प्रावधान रखा गया है। पहले कानूनी कमियों का फायदा उठाकर जो आरोपी बच जाते थे, अब महाराष्ट्र सरकार इस कानून के बल पर उन पर कड़ा शिकंजा कसेगी।
महाराष्ट्र में 28 अगस्त से लागू होगा कानून
बता दें कि महाराष्ट्र में जबरन, धोखे से या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर अब कानूनी शिकंजा पूरी तरह कसने जा रहा है। राज्य में ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ रक्षा बंधन के दिन से लागू होने जा रहा है। कानून के लागू होने के बाद जबरन, धोखे या गैर-कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में 7 साल तक की सजा हो सकती है और अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है।
इस नए और सख्त कानून के तहत अब अपनी मर्जी से भी धर्म बदलने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकारी को सूचित करना होगा।
कानून के मुताबिक, अगर किसी गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन के बाद हुई शादी या रिश्ते से बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे का धर्म वही माना जाएगा, जिसे उसकी मां शादी या रिश्ते से पहले मानती थी। यानी अब महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त कानून, स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले आवेदन और अंतरधार्मिक संबंधों से जन्मे बच्चों के धर्म को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान लागू होंगे।









