September 14, 2026 6:32 pm

‘AI को समझे बिना गुलाम बनकर रह जाएंगे’: केरल में बोले मलेशियाई PM अनवर इब्राहिम, धार्मिक विद्वानों से डिजिटल बदलाव अपनाने की अपील

आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व को एक अत्यंत गंभीर और दूरगामी संदेश दिया है। केरल के ऐतिहासिक सांस्कृतिक केंद्र कोझिकोड के समीप करंतूर में स्थित प्रतिष्ठित शैक्षणिक व इस्लामिक संस्थान ‘मरकजु सकफथी सुन्निय्या’ में आयोजित एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय समारोह को संबोधित करते हुए मलेशियाई प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के धार्मिक विद्वानों, उलेमाओं और विचारकों से दो टूक आह्वान किया कि वे आधुनिक युग की नई जमीनी सच्चाइयों, तकनीकी आविष्कारों और एआई से आंखें मूंदने की भूल कतई न करें। ‘ऑल इंडिया सुन्नी जेम इय्यथुल उलेमा’ के महासचिव और भारत के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार द्वारा प्रतिष्ठित ‘शेख अबूबकर फाउंडेशन एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किए जाने के उपरांत अनवर इब्राहिम ने स्पष्ट कहा कि रूढ़िवादिता और तकनीकी अज्ञानता किसी भी समाज को भविष्य की वैश्विक दौड़ में हाशिए पर धकेल सकती है।

डिजिटल बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अभूतपूर्व रफ्तार पर अपनी गहरी चिंता और दृष्टि साझा करते हुए मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि हमारे पारंपरिक विद्वान और नई पीढ़ी अत्याधुनिक विज्ञान को गहराई से नहीं समझेंगे, तो हम अनजाने में बौद्धिक और आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ जाएंगे। उन्होंने सभा को सचेत करते हुए कहा कि ज्ञान, शोध और तकनीकी महारत हासिल किए बिना कोई भी समाज अपनी संप्रभुता की रक्षा नहीं कर सकता। यदि हम एल्गोरिदम, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और जनरेटिव एआई के बुनियादी सिद्धांतों में दक्षता हासिल नहीं करते हैं, तो हम केवल विदेशी शक्तियों, वैश्विक टेक दिग्गजों और बहुराष्ट्रीय निगमों के हाथों का औजार बनकर रह जाएंगे, जिनका इस्तेमाल वे हमारे सांस्कृतिक संकल्प, स्वतंत्र सोच और सामूहिक इरादों को कमजोर करने के लिए करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें आधुनिक ज्ञान और उच्च विशेषज्ञता को अपनी प्राथमिकता बनाना होगा, लेकिन साथ ही अपने आध्यात्मिक विश्वास, मानवीय गरिमा और बुनियादी नैतिक मूल्यों की रक्षा करने का अटूट संतुलन भी साधना होगा।

मलेशियाई राष्ट्रप्रमुख ने अपने संबोधन का आरंभ स्थानीय मल्याली संस्कृति का आदर करते हुए ठेठ मलयालम मुहावरे ‘एन्थानु वर्थमानम’ (क्या हालचाल हैं) के साथ किया, जिसने सभागार में उपस्थित हजारों श्रोताओं और प्रतिनिधियों का दिल जीत लिया। उन्होंने रेखांकित किया कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश मलेशिया और दक्षिण भारत के केरल, विशेषकर ऐतिहासिक मालाबार तट के बीच सदियों पुराने समुद्री, व्यापारिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। अनवर इब्राहिम ने अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा को सुगम और निर्बाध बनाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और मंच से साझा किया कि वे स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का एक अत्यंत सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक संदेश लेकर कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार तक पहुंचे हैं। इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय गरिमामयी मंच पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के प्रदेश अध्यक्ष पनाक्कड़ सादिकली शिहाब थंगल, केरल के पूर्व उद्योग मंत्री पीके कुन्हालीकट्टी समेत अनेक वरिष्ठ राजनेताओं, सांसदों और राजनयिकों ने मलेशियाई प्रधानमंत्री से उच्चस्तरीय मुलाकात की।

समारोह के समापन पर कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को हदीस के दुनिया भर में सर्वाधिक प्रामाणिक एवं मान्य संग्रह ‘सहीह अल-बुखारी’ की एक अत्यंत दुर्लभ और नक्काशीदार हस्तलिखित पांडुलिपि उपहार स्वरूप भेंट की। इस ऐतिहासिक तोहफे को मलेशियाई प्रधानमंत्री ने अत्यंत सम्मानपूर्वक स्वीकार किया और इसे भारत और मलेशिया के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक सेतु का प्रतीक बताया। इसके पश्चात प्रधानमंत्री इब्राहिम के सम्मान में मरकज परिसर में एक औपचारिक राजकीय रात्रिभोज का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें भारत-मलेशिया संबंधों, दक्षिण एशिया में आधुनिक उच्च शिक्षा के विस्तार, तकनीकी संस्थानों में युवाओं की भागीदारी और नैतिक मूल्यों पर आधारित डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।

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