10 मिनट से लेकर एक घंटे तक अघोषित कटौती, 24 घंटे में 120-140 बार बिजली जाने का दावा; सत्ता पक्ष और विपक्ष की खामोशी पर उठे सवाल

मऊगंज। जिले में इन दिनों बिजली व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि बिजली कटौती अब कभी-कभार होने वाली समस्या नहीं रह गई, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। हालात यह हैं कि कई इलाकों में हर घंटे कई बार बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं और कटौती का समय कभी 10 मिनट तो कभी एक घंटे तक पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक दिन हो या रात, बिजली के आने-जाने का सिलसिला लगातार बना रहता है। बार-बार बिजली गुल होने से घरों में लगे विद्युत उपकरणों के साथ-साथ छोटे कारोबार, दुकानदार, ऑनलाइन काम करने वाले लोग, विद्यार्थी और अस्पताल जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई बार बिजली कब जाएगी और कब आएगी, इसकी कोई स्पष्ट सूचना भी नहीं मिलती।
हर घंटे कटौती ने बढ़ाई परेशानी
उपभोक्ताओं के बीच चर्चा है कि यदि एक घंटे में औसतन 5 से 6 बार बिजली कटती है और हर बार कुछ मिनट से लेकर लंबा अंतराल रहता है, तो पूरे दिन में कटौती की संख्या बेहद ज्यादा हो जाती है। इसी आधार पर स्थानीय लोगों का दावा है कि 24 घंटे के दौरान करीब 120 से 140 बार तक बिजली के आने-जाने की स्थिति बन रही है।
हालांकि, इतनी बार बिजली कटौती के दावे की वास्तविक स्थिति बिजली विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन बार-बार ट्रिपिंग और अघोषित कटौती से परेशान उपभोक्ताओं का सवाल सीधा है—आखिर उन्हें इस अव्यवस्था का समाधान कब मिलेगा?
न सूचना, न स्पष्ट जवाब
सबसे बड़ी परेशानी यह बताई जा रही है कि बिजली कटौती की स्थिति में उपभोक्ताओं को पहले से कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिलती। अचानक बिजली गुल होती है और फिर कब लौटेगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं होता।
लगातार बिजली आने-जाने से इन्वर्टर और विद्युत उपकरणों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं उमस और गर्मी के बीच बार-बार बिजली गुल होने से बच्चों, बुजुर्गों और आम परिवारों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
नेताओं की खामोशी पर भी सवाल
बिजली संकट के बीच अब राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्ता पक्ष के वे जनप्रतिनिधि, जो छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करते नजर आते थे, इस गंभीर समस्या पर फिलहाल खामोश दिखाई दे रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छोटी-छोटी घटनाओं और मुद्दों पर प्रदर्शन, पुतला दहन और आंदोलन करने वाले विपक्षी नेता भी बिजली की लगातार बिगड़ती व्यवस्था को लेकर मैदान में नजर नहीं आ रहे हैं।
चुनाव के समय ही याद आते हैं मतदाता?
बिजली संकट ने नेताओं की सक्रियता को लेकर एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या जनप्रतिनिधियों की सक्रियता सिर्फ चुनाव के समय तक सीमित रह गई है?
लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान घर-घर पहुंचने वाले नेताओं को अब जनता की रोजमर्रा की इस समस्या पर भी आवाज उठानी चाहिए। बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर यदि आम आदमी परेशान है, तो जनप्रतिनिधियों और विपक्षी दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे संबंधित विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगें और समस्या के स्थायी समाधान के लिए दबाव बनाएं।
विभाग से व्यवस्था सुधारने की मांग
अब मऊगंज के बिजली उपभोक्ता चाहते हैं कि विद्युत विभाग बार-बार हो रही ट्रिपिंग और अघोषित कटौती की वास्तविक वजह सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन क्षेत्रों में कितनी कटौती हो रही है और इसे रोकने के लिए विभाग ने क्या कार्ययोजना तैयार की है।
बिजली बिल समय पर वसूलने वाले सिस्टम से अब उपभोक्ताओं का सवाल है—क्या उन्हें निर्बाध और व्यवस्थित बिजली मिलना भी विभाग और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता है?
फिलहाल मऊगंज में बिजली की आंख-मिचौली ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता की इस परेशानी पर जिम्मेदार कब जागेंगे?









